
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनसे अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला से तलाक की अर्जी खारिज कर दी है।वहीं दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्टन ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर भी बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस कदम को सही और संवैधानिक बताया। इन दोनों ही फैसलों से आहत उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि वह कुछ दिनों के लिए एकांतवास में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं रिफ्रेश और रीचार्ज होने के लिए कुछ दिनों तक एकांतवास में रहूंगा। बीते कुछ दिन मेरे लिए बहुत ही निराशाजनक थे। ऐसे में मुझे और मजबूत होकर सामने आना है।
अब्दुल्ला ने 2006 में आई फिल्म रॉकी बॉल्बोआ का डायलाग बोला, कौन है वह जो कहता है कि बड़ी चोट देना बड़ी बात है, बड़ी बात तो बड़ी चोट को सह जाना और पहले से भी ज्यादा मजबूत बनकर उभरना है। अब्दुल्ला ने कहा, बीते कुछ दिन निजी जिंदगी और प्रोफेशनल जिंदगी दोनों के लिए अच्छे नहीं रहे हैं। लेकिन मैं हथियार नहीं डाल सकता। अब्दुल्ला ने कहा कि नए साल में वह फिर नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होंगे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चुनावों को लेकर भी यह बात कही है।
अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, अब ऐसा समय है कि मैं कुछ उन लोगों को समय देना चाहता हूं जो कि मेरी परवाह करते हैं। उनके पास रहकर रीचार्ज और रिफ्रेश होना चाहता हूं ताकि और मजबूत होकर सामने आ सकूं। कुछ सप्ताह के लिए मैं ‘एकांत’ में रहूंगा। 2024 में नई चुनौतियों का सामना करना है। इसमें जम्मू-कश्मीर में होने वाले दो चुनाव शामिल हैं। जंग और संघर्ष जारी रहेगा।
बता दें कि तलाक के मामले में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई कमी नहीं नजर आती है। वहीं क्रूरता के आरोप भी क्लियर नहीं हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही उमर अब्दुल्ला को पत्नी पायल को हर महीने डेढ़ लाख रुपये देने का निर्देश दिया था। इसके अलावा बेटों की पढ़ाई के लिए अलग से 60 हजार रुपये देने को कहा गया था। उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि पायल अपनी असली आर्थिक स्थिति छिपा रही हैं। वहीं कोर्ट ने कहा था कि बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा का खर्च सिर्फ मां पर नहीं डाला जा सकता। उनकी पढ़ाई पूरी होने तक उन्हें यह खर्च देना होगा।