
नौ दिनों के मैराथन मंथन के बाद भाजपा ने तीन राज्यों में मुख्यमंत्रियों का चयन कर लिया है। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के बाद मध्य प्रदेश में मोहन यादव और अब राजस्थान में भजनलाल शर्मा को जिम्मेदारी दी गई है।इन चेहरों के साथ प्रदेश में तो जातिगत समीकरणों को साधा ही गया है। साथ ही 2024 के लिए हिंदी हार्टलैंड को भी बड़ा संदेश दिया गया है। कुछ लोग विभिन्न जातियों और महिलाओं को दरकिनार किए जाने के आरोप लगा सकते हैं। लेकिन सच यह है कि लोकसभा चुनाव के लिहाज से भाजपा और पीएम मोदी ने बेहद सधी हुई चाल चली है। कहने को तो तीन राज्यों की सरकार चुनी गई है, लेकिन यहां के सीएम और और डिप्टी सीएम के चयन के साथ भाजपा ने करीब 250 लोकसभा सीटें साध ली हैं। इन तीन राज्यों के साथ पड़ोसी प्रदेशों, हरियाणा, ओडिशा के साथ-साथ यूपी और बिहार तक इसका असर पड़ना तय है।
छत्तीसगढ़ का उदाहरण
अगर उदाहरण से समझें छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है जहां पर 32 फीसदी आबादी आदिवासी है। यहां पर आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को सीएम बनाया गया है। पार्टी चाहती तो यहां ओबीसी चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकती थी, लेकिन उसने आदिवासी बहुल प्रदेश में उसने साय के साथ जाने का फैसला किया। यहां पर भाजपा ने सरगुजा और बस्तर की आदिवासी बेल्ट वाली 26 में से 22 सीटें जीती थीं। यहां पर साय को सीएम चुनकर भाजपा ने देश के तमाम आदिवासी बहुत क्षेत्रों को संदेश दिया है। बता दें कि भाजपा पहले ही आदिवासी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर एक बड़ा दांव खेल चुकी है। अब छत्तीसगढ़ में साय के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और झारखंड के 22 और 26 फीसदी आदिवासी वोटरों को लुभा रही है। इसके अलावा ओडिशा में भी आदिवासी आबादी 23 फीसदी से ज्यादा है। इन चार राज्यों को मिलाकर कुल 75 सीटें हैं। इनमें से 20 फीसदी सीटें आदिवासियों के लिए रिजर्व हैं। इसके अलावा अन्य दर्जन भर से ज्यादा सीटों पर आदिवासी वोटर्स का प्रभाव है।
मध्य प्रदेश से दूर तक निशाना
इसी तरह मध्य प्रदेश में दो डिप्टी सीएम और स्पीकर के साथ जातिगत समीकरणों को साधा है और 2024 के लिए वोटरों को खुश किया है। यहां पर ओबीसी समुदाय का यादव सीएम, दलित जगदीश देवड़ा और ब्राह्मण राजेंद्र शुक्ला डिप्टी सीएम हैं, जबकि ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के रूप में विधानसभा अध्यक्ष हैं। मध्य प्रदेश में भी भाजपा ने एसटी के लिए आरक्षित 47 में से 24 सीटें जीती हैं। इसके इनाम के रूप में यहां पर जगदीश देवड़ा को डिप्टी सीएम बनाया गया है। इसके अलावा अपर कास्ट के वोटरों को खुश रखने के लिए ब्राह्मण चेहरे को भी डिप्टी सीएम की कुर्सी दी गई है। वहीं, मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने यूपी और बिहार में भी संदेश भेजा है। बिहार और उत्तर प्रदेश को मिलाकर कुल 120 सांसद लोकसभा के लिए चुने जाते हैं। असल में मध्य प्रदेश में यादव कुल आबादी का केवल छह फीसदी ही हैं। लेकिन बिहार में 14 फीसदी से ज्यादा और यूपी में करीब 10 फीसदी ओबीसी हैं। इस तरह एमपी में यादव सीएम बनाना करीब 30 फीसदी आबादी को सशक्तिकरण का संदेश देना है। वहीं, इससे यूपी में अखिलेश यादव और बिहार में तेजस्वी यादव के रणनीतियों को भी झटका लगना तय है।
राजस्थान में ब्राह्मण से बड़ा दांव
अब अगर राजस्थान की बात करें तो यहां पर ब्राह्मण मुख्यमंत्री है, जबकि राजपूत दिया कुमारी और दलित प्रेमचंद बैरवा डिप्टी सीएम हैं। हालांकि राजस्थान में ब्राह्मण वोटर सियासी रूप से प्रभावशाली नहीं हैं। लेकिन पड़ोसी राज्यों में ब्राह्मण भाजपा के लिए बड़ा वोट बैंक हैं। खासतौर पर यूपी में, जोकि राजस्थान के उत्तर-पूर्वी सीमा से लगता है, वहां ब्राह्मण आबादी करीब 10 फीसदी है। यह जनरल वोटर्स में एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा हरियाणा में इससे भी ज्यादा करीब 12 फीसदी ब्राह्मण हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में पांच-पांच फीसदी ब्राह्मण आबादी है। इन सभी राज्यों से बड़ी संख्या में सांसद लोकसभा जाते हैं, जिनमें जनरल कैटेगरी के सांसदों की संख्या भी अच्छी-खासी है।