मुझे पासवर्ड तक नहीं याद, PA के पास रहता है; महुआ के बचाव में बोले JDU सांसद; स्पीकर ने लगाई डांट

पैसे लेकर सवाल पूछने’ के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को शुक्रवार को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मोइत्रा के निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

इससे पहले निष्कासन प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान कई सांसदों ने अपना-अपना पक्ष रखा। इसी दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) के एक सांसद गिरिधारी यादव ने कुछ ऐसा बोल दिया जिस पर लोकसभा स्पीकर ने उन्हें डांट लगा दी।

मोइत्रा के निष्कासन पर लोकसभा में बहस के दौरान, जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव ने कहा कि वह कभी भी अपने खुद प्रश्न नहीं लिखते हैं क्योंकि उन्हें कंप्यूटर चलाना भी नहीं आता है। उन्होंने कहा कि उनका संसद लॉगिन आईडी उनके पीए के पास है। गिरधारी यादव ने कहा, “मुझे तो मेरा पासवर्ड भी याद नहीं है। ये मेरे पीए के पास रहता है। मैंने तो इस बार डर के मारे कोई सवाल नहीं पूछा। पता नहीं क्या हो जाए? मेरा सवाल तो दूसरा करता था। मैं कभी अपना प्रश्न नहीं बनाता हूं। बहुत सारे सांसद नहीं बनाते हैं अपना सवाल। कोई बहुत ही तेजतर्रार लोग होंगे जो 2 घंटे में पढ़ लिए होंगे रिपोर्ट।”

महुआ के समर्थन में बोलते हुए उन्होंने आगे कहा, “हमको आता ही नहीं है। हमको तो कंप्यूटर तो चलाना ही नहीं आता है। हम तीसरी बार सांसद हैं, चार बार विधायक रहे हैं। इस बुढ़ापे मे हम सीख सकते हैं क्या? लालू यादव कहते थे बूढ़ी गाय क्या पोस मांगती है? इस उम्र में अब नहीं हो सकता है। मैंने तो कोई सवाल ही नहीं किया है। 377 पर बड़ी मुश्किल से सवाल डाला था। इसके पहले पूरा प्रश्न करता था। अब नहीं जानते हैं तो नहीं जानते। सभी के लिए अलग-अलग कानून, बीजेपी मनु स्मृति लागू करना चाहती है।”

लोकसभा के पटल पर इसे स्वीकार करने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने फटकार लगाई और कहा कि ऐसा नहीं चल सकता। बिरला ने कहा, “एक सांसद संसद में लिखित प्रश्न प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन किसी अन्य से प्रश्न तैयार नहीं करवा सकता।” गिरधारी के बयान पर लोकसभा स्पीकर ने कहा कि वह सभी सदस्यों से आग्रह करते हैं कि वो अपना सवाल खुद बनाए और पूछें। उन्होंने कहा, “हमारे प्रश्न कोई भी बनाकर नहीं डाल सकता है। आपके खिलाफ इस विषय को लेकर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। ऑन रिकॉर्ड बोल रहे हैं आप। संसद की गरिमा को मैं गिरने नहीं दूंगा।”

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