Rahul Gandhi Protest: गिरिराज सिंह का बड़ा हमला, बोले- ‘देशद्रोह का मुकदमा चले’, विपक्ष ने भी साधा सरकार पर निशाना

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विपक्षी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है।

गिरिराज सिंह ने कहा, “राहुल गांधी ने संवैधानिक पद पर रहकर संविधान की गरिमा को तार-तार किया… वो दूसरे देशों का नकल करके यहां उपद्रव कराना चाहते हैं… प्रधानमंत्री आवास के पास अगर कोई घटना घट जाती… मैं कहता हूं कि जिस तरह की घटना घटी उस पर उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र का अर्थ यह नहीं है कि कोई प्रधानमंत्री आवास में प्रवेश करने का प्रयास करे। उनके अनुसार यदि वहां कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो इससे देश की लोकतांत्रिक छवि पर गंभीर असर पड़ सकता था।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने केंद्र सरकार पर युवाओं और छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “देश के विद्यार्थियों और युवाओं के साथ मोदी सरकार अन्याय कर रही है, उनका भविष्य छीन रही है और न्याय मांगने पर यह लाठी और आंसू गैस के गोले भेंट कर रही है. दिल्ली में हुई बर्बरता के खिलाफ अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन चुका है. लाठी नहीं नौकरी चाहिए, जुमला नहीं जवाबदेही चाहिए.”

इधर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, “बर्बरता और बेशर्मी की सारी हदें पार कर रही है मोदी सरकार के निर्देश पर दिल्ली पुलिस… आज प्रधानमंत्री आवास के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के सांसदों व नेताओं के साथ जैसा बर्ताव दिल्ली पुलिस ने किया है वो शर्मनाक और देश में खतरे में पड़े लोकतंत्र को दर्शाता है.”

प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर भाजपा इसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में पेश कर रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।

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