US-India Trade Deal पर बड़ा अपडेट! पीयूष गोयल बोले- इस शर्त के बिना अमेरिका से कोई समझौता नहीं

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (US-India Trade Deal) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने महत्वपूर्ण बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक भारतीय उत्पादों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ लाभ सुनिश्चित करने वाला ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा.

भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाने पर फोकस

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत ऐसे फ्रेमवर्क को लेकर जारी है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अन्य देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके. उनका कहना है कि व्यापार समझौते का उद्देश्य केवल बाजार पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के हितों की रक्षा करना भी है.

उन्होंने कहा, “जब तक तुलनात्मक लाभ के एक फ्रेमवर्क को बनाने पर बात नहीं होती, तब तक हम अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते हैं. हालांकि, भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता को अंतिम रूप देने के काफी करीब पहुंच चुके हैं.”

6 फरवरी को बनी थी व्यापक सहमति

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की व्यापक रूपरेखा पर 6 फरवरी 2026 को सहमति बन गई थी. इसके बाद से दोनों देशों की वार्ता टीमें समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर लगातार काम कर रही हैं.

गोयल के मुताबिक, इस समय दोनों देशों के विशेषज्ञ और वार्ता प्रतिनिधि समझौते की बारीकियों को अंतिम रूप देने के लिए विस्तृत चर्चा कर रहे हैं ताकि भविष्य में इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके.

कानूनी और नीतिगत प्रावधानों पर चल रही चर्चा

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका की टीमें फिलहाल उन कानूनी और नीतिगत व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श कर रही हैं, जिनके माध्यम से समझौता लागू होने के बाद भारत को वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके.

उन्होंने संकेत दिया कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश ऐसे समाधान तलाश रहे हैं जो व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय निर्यातकों के हितों को भी सुरक्षित रखें.

अंतिम चरण में पहुंच सकती है ट्रेड डील

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित यह व्यापार समझौता लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है. हालिया बयान से संकेत मिलते हैं कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, लेकिन भारत अपनी शर्तों और व्यापारिक हितों से समझौता करने के पक्ष में नहीं है. ऐसे में तुलनात्मक टैरिफ लाभ से जुड़ा फ्रेमवर्क इस डील का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.

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