भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत एक बार फिर अपनी तीखी टिप्पणी को लेकर चर्चा में आ गए हैं। बुधवार को साइबर अपराध से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत में की गई उनकी टिप्पणी अब व्यापक चर्चा का विषय बन गई है, खासकर इसलिए क्योंकि इससे पहले उनके कथित “कॉकरोच” वाले बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो चुका है।
साइबर अपराध के आरोपी को जमानत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट में 17 जून 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ साइबर फ्रॉड से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से जमानत की मांग की गई, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
जमानत याचिका खारिज करते हुए CJI ने साइबर अपराधों की गंभीरता पर चिंता जताई और कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। उन्होंने माना कि साइबर ठगी के मामलों में लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की जाती है और अपराधियों तक पहुंचना भी आसान नहीं होता।
सुनवाई के दौरान क्या बोले CJI?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने आरोपी को फटकार लगाते हुए कहा, ‘तुम लोग परजीवी हो, जो निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगते हो. साइबर अपराधियों के प्रति हमें बहुत सख्त होना ही पड़ेगा. तुम लोग किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहते. तमिलनाडु में किसी से फ्रॉड करते हो और फिर से वहां से जम्मू चले जाते हो. समाज का भला इसी में है कि तुम जैसे लोग जेल की सलाखों के भीतर ही बंद रहें.’
अदालत की इस टिप्पणी को साइबर अपराध के खिलाफ न्यायपालिका के कड़े रुख के रूप में देखा जा रहा है।
साइबर अपराधियों को बताया समाज के लिए खतरा
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर अपराधी लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाते हैं और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे अपराधी अक्सर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय रहते हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
पहले ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर भी हुआ था विवाद
इससे पहले भी जस्टिस सूर्यकांत एक टिप्पणी को लेकर विवादों में आ चुके हैं। एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान उनकी कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
उस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” नाम से एक ऑनलाइन राजनीतिक समूह तक चर्चा में आ गया था। आलोचकों ने उस टिप्पणी को बेरोजगार युवाओं से जोड़कर देखा था, जबकि बाद में CJI ने स्पष्टीकरण दिया था कि उनकी टिप्पणी का संदर्भ कुछ और था।
टिप्पणी पर दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था, ‘मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया है. मेरा बयान उन लोगों के लिए था, जो नकली और फर्जी डिग्री लेकर कानूनी पेशे में घुस जाते हैं.’
अब साइबर अपराध मामले में की गई नई टिप्पणी के बाद एक बार फिर उनकी न्यायालयीन टिप्पणियां सार्वजनिक बहस का विषय बन गई हैं।