मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त हो गया है और ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह समझौता दो चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, तेल प्रतिबंध और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान, यूरेनियम पर रहेगी निगरानी
रिपोर्ट के मुताबिक समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। ईरान ने भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने का वादा किया है। इसके साथ ही देश में मौजूद उच्च संवर्धित (Highly Enriched) यूरेनियम का डी-एनरिचमेंट ईरान के भीतर ही किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों द्वारा की जाएगी। हालांकि परमाणु कार्यक्रम से संबंधित इन प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने के लिए समझौते के दूसरे चरण को भी प्रभावी होना आवश्यक बताया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट से हटेगी नाकेबंदी, जहाजों को मिलेगी राहत
समझौते के तहत सबसे बड़ी आर्थिक और रणनीतिक घोषणा Strait of Hormuz को लेकर की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना की ओर से की गई नाकेबंदी हटाई जाएगी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खोला जाएगा।
बताया गया है कि 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को युद्ध-पूर्व स्थिति में बहाल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा लेबनान समेत पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में युद्धविराम लागू करने की भी योजना है।
ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में मिलेगी छूट
समझौते के पहले चरण में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को 60 दिनों के लिए हटाने का प्रस्ताव शामिल है। यदि ईरान तय शर्तों का पालन करता है तो प्रतिबंधों में दी गई राहत को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार ईरान अपनी जब्त की गई विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराना चाहता है, जबकि अमेरिका इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के पक्ष में है। ऐसे में दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है।
60 दिन का युद्धविराम, समझौते को मिला ‘इस्लामाबाद एग्रीमेंट’ नाम
समझौते के पहले चरण के तहत 60 दिनों का युद्धविराम लागू किया जाएगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance स्विट्जरलैंड के Geneva में इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे समझौते को “इस्लामाबाद एग्रीमेंट” नाम दिया गया है। यदि दोनों पक्ष निर्धारित शर्तों का पालन करते हैं तो यह समझौता मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
क्या बदल सकता है पश्चिम एशिया का समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता पूरी तरह लागू होता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार मार्गों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देश समझौते की शर्तों को किस तरह लागू करते हैं।