उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। लंबे सत्यापन, दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद जारी की गई इस सूची में मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां लाखों नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया है, वहीं बड़ी संख्या में नाम भी हटाए गए हैं।
पंचायत चुनाव के लिए जारी हुई अंतिम वोटर लिस्ट
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अंतिम मतदाता सूची जिला स्तर पर प्रकाशित की गई है। आयोग के मुताबिक यह सूची व्यापक सत्यापन प्रक्रिया और प्राप्त दावों एवं आपत्तियों के निस्तारण के बाद तैयार की गई है।
इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को अनंतिम मतदाता सूची जारी की गई थी, जिसके बाद संशोधन की प्रक्रिया पूरी की गई। अब अंतिम सूची जारी होने के साथ पंचायत चुनाव की आगामी तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है।
1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए
अंतिम मतदाता सूची के अनुसार करीब 1.81 करोड़ नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया है। वहीं सत्यापन के दौरान 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से सूची से हटा दिए गए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में कुल 40.19 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है। यह बदलाव आगामी पंचायत चुनावों के गणित पर भी असर डाल सकता है।
वोटरों को मिला नया 9 अंकों का पहचान नंबर
इस बार निर्वाचन आयोग ने मतदाता पहचान व्यवस्था में भी बदलाव किया है। पंचायत चुनाव के लिए पंजीकृत प्रत्येक मतदाता को 9 अंकों का विशेष पहचान नंबर दिया गया है।
आयोग का मानना है कि इस व्यवस्था से मतदाताओं की पहचान अधिक सटीक होगी और चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
कई जिलों में डाउनलोडिंग को लेकर आई शिकायतें
हालांकि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद कई जिलों से तकनीकी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर लोगों को सूची डाउनलोड करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार तकनीकी खामियों के कारण वेबसाइट पर सूची डाउनलोड करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई, हालांकि संबंधित अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल टले हुए हैं पंचायत चुनाव
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण चुनाव कार्यक्रम फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाया है।
इसी वजह से ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई है। दूसरी ओर, आरक्षण से जुड़े मामले पर न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है और इस संबंध में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
चुनावी प्रक्रिया को मिल सकता है नया मोड़
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन को पंचायत चुनाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर आरक्षण से जुड़े मुद्दे और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी हुई है। जैसे ही कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी, राज्य में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।