शपथ के 48 घंटे भी नहीं बीते और शुरू हुई नाराजगी! डीके शिवकुमार सरकार में विभागों को लेकर बढ़ा असंतोष

कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पहले वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी और अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी विभाग बदलने की मांग उठाकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी प्रतिक्रियाओं ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

मुनियप्पा ने उठाई विभाग बदलने की मांग

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने साफ कहा है कि वह अपने मौजूदा विभाग से संतुष्ट नहीं हैं और इस संबंध में पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में कर्नाटक दौरे पर आए राहुल गांधी से भी उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा की थी।

मुनियप्पा का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं को उनके अनुभव और प्रोटोकॉल के अनुसार जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर काम कर सकें।

राहुल गांधी और सोनिया गांधी से करेंगे चर्चा

मुनियप्पा ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी मांग को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी और सोनिया गांधी के सामने अपनी बात रखेंगे और उम्मीद करते हैं कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

उनका मानना है कि विभागों का आवंटन वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

इन विभागों की जिम्मेदारी चाहते हैं मुनियप्पा

मुनियप्पा ने कहा कि यदि उन्हें समाज कल्याण, कृषि या सिंचाई जैसे विभाग दिए जाते हैं तो वह जनता की अधिक प्रभावी ढंग से सेवा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग संभाल रहे हैं और अब नई जिम्मेदारी चाहते हैं।

उनके बयान से साफ है कि वह सरकार में अधिक प्रभावशाली और जनहित से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी लेने के इच्छुक हैं।

पहले रामलिंगा रेड्डी भी जता चुके हैं नाराजगी

मुनियप्पा से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी भी विभागों के आवंटन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। रेड्डी का दावा है कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन बाद में उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का मंत्रालय सौंप दिया गया।

इस घटनाक्रम ने सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिया समाधान का भरोसा

मंत्रियों की नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि रामलिंगा रेड्डी की चिंताओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाल लिया जाएगा और किसी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘रामलिंगा रेड्डी मेरे सहयोगी और वरिष्ठ नेता हैं. उनकी चिंता यह है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, उसमें काफी यात्रा करनी पड़ती है और वह कोई दूसरा विभाग चाहते हैं. मैं इस मामले पर उनसे चर्चा करूंगा और इसका समाधान निकालूंगा. चिंता की कोई बात नहीं है.’

कांग्रेस सरकार के सामने बढ़ी समन्वय की चुनौती

सरकार गठन के शुरुआती चरण में ही मंत्रियों की ओर से विभागों को लेकर उठ रही आपत्तियों ने कांग्रेस नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि असंतुष्ट नेताओं को जल्द संतुष्ट नहीं किया गया तो सरकार के भीतर असहमति के स्वर और मुखर हो सकते हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व इन नाराज नेताओं को किस तरह मनाते हैं और क्या विभागों में बदलाव की मांग पर कोई फैसला लिया जाता है।

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