UP Panchayat Chunav पर हाईकोर्ट सख्त! चुनाव की तारीख पूछी, OBC रिपोर्ट के लिए तय की समयसीमा

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर राज्य निर्वाचन आयोग से सीधा सवाल पूछा है कि चुनाव आखिर कब तक कराए जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट छह महीने के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 जुलाई को होगी।

पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

बुधवार, 3 जून को हुई सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की संभावित तारीख के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई और सरकार की कुछ दलीलों पर भी पूरी तरह सहमति नहीं जताई।

यह याचिका ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दायर की गई है, जिसमें पंचायत चुनाव समय पर कराने और संबंधित प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी गई है।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर भी कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को छह महीने तक प्रशासक नियुक्त करने के फैसले पर भी असंतोष जाहिर किया। कोर्ट ने संकेत दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के नियमित चुनावों में अनावश्यक देरी उचित नहीं मानी जा सकती।

इसके साथ ही अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट छह महीने के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिससे पंचायत चुनावों में आरक्षण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले होंगे?

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कराए जाएंगे। हालांकि चुनाव की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अदालत द्वारा समयसीमा तय करने और आयोग से जवाब मांगने के बाद चुनावी तैयारियों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अदालत की निगरानी में अब चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग पर दबाव बढ़ सकता है।

ओम प्रकाश राजभर ने साधा विपक्ष पर निशाना

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बिना किसी नाम का उल्लेख किए विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “हर अच्छे काम में अड़ंगा लगाना सपा की पुरानी आदत बन चुकी है. ऐसा लग रहा है कि अब गांवों में चल रहे विकास कार्यों को प्रभावित करने के लिए सपा पूरे पंचायत तंत्र को ही अदालती उलझनों में फंसाने की कोशिश में जुट गई है.”

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले का किया बचाव

राजभर ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाए रखने के उद्देश्य से अगले पंचायत चुनाव तक ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा, “जब प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी विभिन्न परीक्षाओं, एसआईआर और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त है तथा पंचायत चुनाव तत्काल कराना संभव न हो, तब सरकार की प्राथमिकता है कि ग्राम पंचायतों का कामकाज बिना किसी बाधा के चलता रहे.”

राजभर के अनुसार, इसी उद्देश्य से ग्राम प्रधानों को अधिकार देने का निर्णय लिया गया है ताकि ग्रामीण विकास और जनसेवा प्रभावित न हो।

पंचायत चुनाव को लेकर सियासत तेज

ओम प्रकाश राजभर ने आगे आरोप लगाया कि यदि इस फैसले को कानूनी विवादों में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है तो ग्रामीण जनता इसका जवाब आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में देगी।

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को शक्तिहीन बनाने और गांवों के विकास को बाधित करने की किसी भी कोशिश को जनता स्वीकार नहीं करेगी।

10 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। माना जा रहा है कि उस दिन राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम और तैयारियों को लेकर अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकता है।

हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और OBC आरक्षण से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

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