होर्मुज संकट के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम! पेट्रोल-डीजल पर घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी, जानिए 1 जून से कितनी लगेगी टैक्स

वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में राहत देने का फैसला किया है। मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है, जो 1 जून 2026 से लागू होगी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए संशोधन के बाद पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

1 जून से लागू होंगी नई दरें

सरकार द्वारा जारी संशोधित व्यवस्था के तहत पेट्रोल के निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया जाएगा। यह पूरी राशि विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में वसूली जाएगी, जबकि इस पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू नहीं होगा।

वहीं, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर 9.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क तय किया गया है। यह भी केवल विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में वसूला जाएगा। डीजल के निर्यात पर 13.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लागू रहेगा।

हर 15 दिन में होती है दरों की समीक्षा

पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की समीक्षा सरकार हर पखवाड़े यानी 15 दिनों में करती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों का अध्ययन किया जाता है।

वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर सरकार निर्यात शुल्क की दरों में बदलाव करती है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों के बीच संतुलन बना रहे।

आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगा। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले मौजूदा टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसका मतलब है कि आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल न तो कोई अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है और न ही कोई कटौती की गई है।

मार्च में पहली बार लागू किया गया था शुल्क

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) के रूप में निर्यात शुल्क पहली बार 27 मार्च 2026 को लागू किया गया था।

सरकार का कहना था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया था।

अगली समीक्षा तक लागू रहेंगी नई दरें

अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शुल्क दरों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। इससे पहले 16 मई 2026 को भी शुल्क संरचना में संशोधन किया गया था।

अब 1 जून से लागू होने वाली नई दरें अगले पखवाड़े तक प्रभावी रहेंगी। इसके बाद वैश्विक बाजार की स्थिति के आधार पर सरकार अगला फैसला ले सकती है।

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