उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में ‘ओपन जेल’ की अवधारणा को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जेल सिर्फ पेशेवर अपराधियों और माफिया के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों में बंद लोगों के लिए ओपन जेल जैसी व्यवस्था ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है।
‘जेल सिर्फ बंद रखने की जगह नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेलों को केवल कैदियों को बंद रखने का स्थान नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कारागारों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जेलों में सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाओं को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए जेलों को नई पहचान दी जाए।
छोटे अपराधियों के लिए ‘ओपन जेल’ पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘ओपन जेल’ योजना को विशेष महत्व देते हुए इसके लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए. छोटे अपराधों के लिए ‘ओपन जेल’ उपयोगी होगी.”
सरकार का मानना है कि छोटे अपराधों में शामिल लोगों को सुधारात्मक माहौल देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना ज्यादा प्रभावी होगा।
समयपूर्व रिहाई के आंकड़ों में बड़ा बदलाव
बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले कुछ वर्षों में समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच जहां 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, वहीं 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 हो गई। इसके बाद 2022 से 2026 के बीच 3846 बंदियों को समयपूर्व रिहाई दी गई।
इसके अलावा जुर्माना जमा कर जेल से बाहर आने वाले कैदियों की संख्या भी काफी बढ़ी है।
बुजुर्ग और बीमार कैदियों की बनेगी सूची
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित बंदियों, बच्चों के साथ जेल में रह रहीं महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने वाले कैदियों की अलग सूची तैयार की जाए।
सरकार इन मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी में है।
जेलों में घटा ओवरक्राउडिंग का दबाव
राज्य सरकार ने दावा किया कि जेलों में भीड़भाड़ की स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी जबकि कैदियों की संख्या 96,383 पहुंच गई थी। उस समय ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।
वर्तमान में प्रदेश में 77 जेलें संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है और बंदियों की संख्या 79,782 है। अब ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।
नई जेलों और बैरकों का तेजी से निर्माण
बैठक में बताया गया कि 2017 के बाद चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली सहित सात नई जेलें शुरू की गई हैं। इससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता बढ़ी है।
इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में नई जेलों का निर्माण कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला जेल निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।
हाईटेक हो रही यूपी की जेलें
सीएम योगी ने जेलों में सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सुरक्षा से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन कैमरे, बैगेज स्कैनर, बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।
इसके साथ ही सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी और मेनवॉल पर वायर फेंसिंग की व्यवस्था की गई है।
कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को और बढ़ाया जाए। प्रदेश की कई जेलों में सिलाई, कम्बल, फिनायल, मसाला, प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब, पॉटरी और हैंडीक्राफ्ट जैसे उद्योग चलाए जा रहे हैं।
प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना भी संचालित हो रही है।