मेकेदातु बांध पर फिर भड़का कावेरी विवाद, तमिलनाडु CM विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कर्नाटक पर लगाए गंभीर आरोप

कावेरी जल विवाद एक बार फिर गर्माता नजर आ रहा है। कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक आमने-सामने आ गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक सरकार की योजना पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सुप्रीम कोर्ट के फैसले और कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के आदेशों का उल्लंघन करती है।

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी में क्या बोले CM विजय?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने मंगलवार (26 मई 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते हुए कहा, “मेकेदातु परियोजना के लिए कर्नाटक की डीपीआर खारिज करें, उसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन न करने की सलाह दें.”

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार द्वारा मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि पूजन की तैयारी करना न्यायिक आदेशों के खिलाफ है। विजय ने कहा कि यह कदम कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

तमिलनाडु सरकार ने तेज किए कानूनी प्रयास

इस विवाद को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री विजय ने सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई थी। बैठक में कानूनी विशेषज्ञों, वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ मेकेदातु परियोजना के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कावेरी नदी के पानी पर तमिलनाडु के अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी हुआ जिक्र

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मेकेदातु परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिकाओं का निपटारा कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह तय करना केंद्रीय जल आयोग (CWC) का काम होगा कि परियोजना पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों और जल बंटवारे की व्यवस्था के अनुरूप है या नहीं।

इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि 11 दिसंबर 2025 को दायर पुनर्विचार याचिका भी खारिज की जा चुकी है। इसके बावजूद तमिलनाडु सरकार अब नई कानूनी रणनीति पर काम कर रही है।

बैठक में कई मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद

इस हाई लेवल बैठक में जल संसाधन मंत्री एस. आनंद, लोक निर्माण मंत्री आधारव अर्जुना और ऊर्जा एवं कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मलकुमार शामिल हुए। साथ ही मुख्य सचिव एम. साइकुमार, एडवोकेट जनरल विजय नारायण और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। कुछ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।

सरकारी बयान के मुताबिक, बैठक में राज्य के हितों की रक्षा के लिए आगे की रणनीति और संभावित कानूनी विकल्पों पर विस्तार से विचार किया गया।

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