Xi Jinping ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ बीजिंग में हुई अहम बैठक के दौरान अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। व्हाइट हाउस के अनुसार चीन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
दोनों नेताओं की यह मुलाकात बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल’ में हुई, जहां व्यापार, ऊर्जा, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
शी जिनपिंग बोले- 2026 रिश्तों के लिए ऐतिहासिक साल
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि 2026 चीन-अमेरिका संबंधों के लिए “ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला साल” हो सकता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका और चीन के संबंध दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रिश्तों में से एक हैं।
चीन क्यों बढ़ाना चाहता है अमेरिकी तेल आयात?
व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन ने Strait of Hormuz पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने में रुचि दिखाई है।
हालांकि एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चीन के सरकारी मीडिया ने बैठक में तेल खरीद के मुद्दे का सीधा उल्लेख नहीं किया।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक होने के बावजूद चीन अमेरिका से अपेक्षाकृत कम कच्चा तेल खरीदता है।
2020 के बाद लगातार घटा तेल व्यापार
रिपोर्ट के अनुसार 2020 में चीन अमेरिका से प्रतिदिन करीब 3,95,000 बैरल तेल खरीद रहा था, जो उसके कुल आयात का लगभग 4 प्रतिशत था।
इसके बाद यह आंकड़ा लगातार घटता गया। 2024 में ट्रंप की सत्ता में वापसी से पहले चीन की अमेरिकी तेल खरीद घटकर करीब 1,93,000 बैरल प्रतिदिन रह गई थी, जिसकी कुल कीमत लगभग 6 अरब डॉलर बताई गई।
ट्रेड वॉर का सबसे ज्यादा असर तेल व्यापार पर
अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का बड़ा असर तेल व्यापार पर पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने मई 2025 से अमेरिका से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था।
हालांकि अब दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के बाद ऊर्जा सहयोग को लेकर नए संकेत मिल रहे हैं।
ताइवान मुद्दे पर अमेरिका को दी चेतावनी
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे पर अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर इस संवेदनशील मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन-अमेरिका संबंधों का “सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय” बताया है।
माओ निंग ने कहा, “राष्ट्रपति जिनपिंग का मानना है कि यदि this मुद्दे का हल समझदारी से निकाला गया तो दोनों देशों के बीच स्थिरता बनी रहेगी.”
ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा पर टिकी दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की तीन दिवसीय चीन यात्रा वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और एशियाई सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। खासकर ईरान तनाव और ताइवान विवाद के बीच यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े संकेत दे रही है।