उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए कल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। 19 दिसंबर से उत्तर प्रदेश विधानमंडल का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, जो 24 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के दौरान योगी सरकार उन 8 अध्यादेशों को विधेयक (Bill) के रूप में सदन के पटल पर रखेगी, जिन्हें मानसून सत्र के बाद लागू किया गया था। यदि ये विधेयक दोनों सदनों से पारित हो जाते हैं और राज्यपाल की मुहर लग जाती है, तो ये आधिकारिक तौर पर प्रदेश के नए कानून बन जाएंगे।
पेंशन से लेकर निजी विश्वविद्यालय तक; इन 8 विधेयकों पर रहेगी नजर
सरकार जिन विधेयकों को कानून बनाने की तैयारी में है, उनमें शिक्षा, व्यापार और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों की सूची इस प्रकार है:
- उत्तर प्रदेश पेंशन की हकदारी तथा विधिमान्यकरण विधेयक
- उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक
- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) विधेयक
- उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (संशोधन) विधेयक
- उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (तीसरा, चौथा और पांचवां संशोधन) विधेयक
- उत्तर प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान (संशोधन) विधेयक
विपक्ष ने कसी कमर: कानून व्यवस्था और किसानों पर होगा वार
भले ही सरकार अपने विधायी कार्यों को पूरा करने की तैयारी में है, लेकिन विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने भी सरकार को घेरने का पूरा मन बना लिया है। सत्र के दौरान सपा द्वारा कानून-व्यवस्था, गन्ना किसानों के बकाये, एसआईआर और कोडीन सिरप जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग की जा सकती है। 21 और 22 दिसंबर को अवकाश रहेगा, जबकि 23 और 24 दिसंबर को विधायी कार्यों पर चर्चा की जाएगी।
सर्वदलीय बैठक में सहयोग की अपील
सत्र के सुचारू संचालन के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सभी दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सदन की गरिमा बनाए रखने और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण चर्चा करने की अपील को सभी दलों ने स्वीकार किया है। अब देखना यह होगा कि हंगामे के बीच सरकार इन 8 अहम विधेयकों को कितनी आसानी से पारित करा पाती है।