कफ सिरप से बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने कहा- ‘डिसमिस्ड’, याचिका खारिज

नई दिल्ली। कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उसे खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रमेश गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी की गंभीरता पर सवाल उठाया और सुनवाई के दौरान कहा, “डिसमिस्ड।”

याचिकाकर्ता की दलील

अधिवक्ता विशाल तिवारी ने अदालत में कहा कि गलत दवाओं का बाजार में पहुंचना कोई नया मामला नहीं है। उन्होंने मांग की कि दवाओं के निर्माण, परीक्षण और वितरण की प्रक्रिया की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और बच्चों की मौत की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
तिवारी ने कहा, “गलत दवाओं के बाजार में पहुंचने का यह पहला मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। इस मामले में कई बच्चों की मौत हुई है, लेकिन राज्य सरकारें एक-दूसरे की कमी गिना रही हैं।”

सॉलिसिटर जनरल का जवाब

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दखल देते हुए कहा कि वह किसी राज्य का पक्ष नहीं रख रहे हैं, लेकिन बच्चों की मौत गंभीर मुद्दा जरूर है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु से लेकर मध्य प्रदेश तक सभी राज्य सरकारें कार्रवाई कर रही हैं।
मेहता ने कहा, “कानून के तहत कार्रवाई हो रही है, कई लोगों की गिरफ्तारी की गई है और संबंधित दवा को बाजार से हटा दिया गया है।”

कोर्ट ने जताई नाराजगी

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि याचिकाकर्ता विशाल तिवारी हर चर्चित विषय पर मीडिया रिपोर्ट देखने के बाद तुरंत एक नई पीआईएल दायर कर देते हैं। इस पर CJI गवई ने तिवारी से पूछा कि अब तक उन्होंने कितनी पीआईएल दायर की हैं।
तिवारी ने जवाब दिया, “शायद 8 या 10।” यह सुनते ही मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत कहा, “डिसमिस्ड।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

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