उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद क्या होता है? जानें नए चुनाव की प्रक्रिया और इसकी खास बातें

नई दिल्ली। जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 की देर रात उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर देश को चौंका दिया।
भारत के इतिहास में वह तीसरे ऐसे उपराष्ट्रपति बने हैं जिन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा।
अब सवाल उठता है कि अगला उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाएगा, कब चुनाव होगा, और क्या इसकी प्रक्रिया बाकी संवैधानिक पदों से अलग है?

कौन संभालेगा उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारी?

भारतीय संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का कोई प्रावधान नहीं है।
चूंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति यह ज़िम्मेदारी संभालते हैं।
फिलहाल यह जिम्मेदारी हरिवंश नारायण सिंह के पास रहेगी, जो राज्यसभा के उपसभापति हैं।

उपराष्ट्रपति पद का चुनाव कब होगा?

राष्ट्रपति पद के लिए जहां चुनाव 6 महीने के भीतर करवाना जरूरी होता है,
वहीं उपराष्ट्रपति पद के लिए यह सीमा 60 दिन है – लेकिन केवल तब जब कार्यकाल पूरा हो जाए।
यदि कार्यकाल के बीच इस्तीफा दिया गया हो, तो कोई समयसीमा निर्धारित नहीं है।
इस स्थिति में चुनाव चुनाव आयोग की घोषणा के आधार पर होते हैं।

उपराष्ट्रपति का कार्यकाल कैसे तय होता है?

ध्यान देने वाली बात यह है कि जब बीच कार्यकाल में कोई उपराष्ट्रपति इस्तीफा देता है,
तो नए चुने गए उपराष्ट्रपति को सिर्फ शेष कार्यकाल नहीं, पूरा पांच साल का कार्यकाल मिलता है।
वह जिस दिन पदभार ग्रहण करते हैं, उसी दिन से उनका नया कार्यकाल शुरू होता है।

चुनाव प्रक्रिया कैसी होती है?

उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित व मनोनीत सदस्यों द्वारा किया जाता है।
राज्य विधानसभाएं इसमें भाग नहीं लेतीं, जबकि राष्ट्रपति चुनाव में वे शामिल होती हैं।
मतदान संसद भवन, नई दिल्ली में कराया जाता है।

वोटिंग का तरीका क्या होता है?

यह चुनाव गोपनीय मतदान, और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन) के तहत एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) से होता है।

  • सांसद उम्मीदवारों को वरीयता क्रम (1, 2, 3…) में रैंक करते हैं।
  • सभी वोटों की वैल्यू समान होती है।
  • जीत के लिए किसी उम्मीदवार को कुल वैध वोटों का 50%+1 (कोटा) प्राप्त करना होता है।
  • यदि कोई उम्मीदवार पहले राउंड में कोटा पार नहीं करता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोट दूसरी वरीयता के अनुसार ट्रांसफर होते हैं।
  • यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक कोई उम्मीदवार कोटा पार नहीं कर लेता।

उपराष्ट्रपति बनने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए?

  • भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • उम्र कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए।
  • राज्यसभा के सदस्य बनने के योग्य होना चाहिए।
  • किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए (राज्य या केंद्र सरकार के अधीन)।
  • किसी संसदीय क्षेत्र में निर्वाचक के रूप में पंजीकृत होना चाहिए।

इस पूरी प्रक्रिया से यह साफ होता है कि उपराष्ट्रपति पद का चुनाव तकनीकी रूप से बेहद सुनियोजित और गोपनीय होता है, और इसकी प्रक्रिया राष्ट्रपति चुनाव से कई मायनों में अलग है।

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