उत्तर प्रदेश। बिजली विभाग अब तकनीक का सहारा लेकर लाइन लॉस और बिजली चोरी पर कड़ा शिकंजा कसने जा रहा है। यूपी के एक जिले में जल्द ही 1100 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर मीटर (DT मीटर) लगाए जाएंगे। इसका मकसद है बिजली की खपत की सटीक मॉनिटरिंग करना और बिजली चोरी वाले इलाकों की पहचान करना।
क्या है DT मीटर और क्यों जरूरी है?
डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर मीटर ट्रांसफॉर्मर के नजदीक लगाए जाते हैं और यह बताते हैं कि किसी ट्रांसफॉर्मर से कितनी बिजली सप्लाई हुई और उसका कितना उपयोग हुआ।
इसके आधार पर यह साफ हो जाएगा कि किस उपभोक्ता या क्षेत्र में बिजली का उपयोग अधिक है लेकिन बिल कम आ रहा है, यानी वहां बिजली चोरी की आशंका है।
लाइन लॉस बना चिंता का कारण
बिजली विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी 25% से 30% तक लाइन लॉस बना हुआ है।
हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इसमें कुछ कमी आई है, लेकिन विभाग इसे और घटाना चाहता है।
लाइन लॉस यानी वह बिजली जो सप्लाई के दौरान बर्बाद होती है या चोरी हो जाती है।
किन इलाकों में लगेगा DT मीटर?
नगर क्षेत्र में मौजूद 13 उपकेंद्रों के जरिए 70,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं को बिजली दी जा रही है।
इनमें से जिन इलाकों में लाइन लॉस ज्यादा है, वहां DT मीटर लगाए जाएंगे।
इन मीटरों की मदद से विभाग क्षेत्रवार बिजली खपत की सटीक जानकारी जुटा सकेगा और बिजली चोरी पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
अधिकारी ने क्या कहा?
अधिशासी अभियंता पी.के. शर्मा ने बताया:
“लाइन लॉस और कम करने को ध्यान में रखकर नगर क्षेत्र में 1100 DT मीटर लगाने की योजना है। ये मीटर ट्रांसफॉर्मर के समीप लगाए जाएंगे ताकि यह जान सकें कि किस क्षेत्र में बिजली की खपत और बिलिंग में अंतर आ रहा है। इससे बिजली चोरी की पहचान आसान हो जाएगी।”
उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ
इस तकनीक से न केवल विभाग को राजस्व नुकसान से राहत मिलेगी, बल्कि ईमानदार उपभोक्ताओं को बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
बिजली चोरी पर नियंत्रण से लोड बैलेंसिंग में सुधार होगा और फॉल्ट व ट्रिपिंग की समस्या भी घटेगी।