DM Vs CMO Dispute: कानपुर विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन: सीएमओ हरिदत्त नेमी सस्पेंड, ऑडियो क्लिप बनी वजह

DM Vs CMO Dispute, कानपुर विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन: सीएमओ हरिदत्त नेमी सस्पेंड, ऑडियो क्लिप बनी वजह

कानपुर। कानपुर में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद ने आखिरकार बड़ा मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को सस्पेंड कर दिया है। उनकी जगह श्रावस्ती के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उदयनाथ को कानपुर का नया सीएमओ नियुक्त किया गया है।

हालांकि, डॉ. नेमी को हटाए जाने के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सहित कई विधायकों ने भी सिफारिशें की थीं, लेकिन सरकार ने कार्रवाई करने में देर नहीं की। गुरुवार को उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शासन को पत्र भेजकर सीएमओ के निलंबन की संस्तुति की थी। इस बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें सीएमओ पर डीएम के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने का आरोप लगा। हालांकि, सीएमओ ने इसे फेक और AI-जनरेटेड बताया, लेकिन जिलाधिकारी ने उन्हें मीटिंग से बाहर जाने और मामले की जांच कराने का आदेश दे दिया।

राजनीतिक दबाव भी न रोक सका कार्रवाई

11 जून को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने डिप्टी सीएम और चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर सीएमओ का तबादला रोकने की अपील की थी। पत्र में उन्होंने लिखा कि, “सीएमओ का व्यवहार जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति मृदुल और सराहनीय है, और जनहित में उन्हें कानपुर में ही बनाए रखा जाए।”
इसके अगले ही दिन कानपुर के चार विधायकों के समर्थन पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

मीटिंग में हुआ टकराव

शनिवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक के दौरान सीएमओ और एसीएमओ जब पहुंचे तो डीएम ने ऑडियो पर स्पष्टीकरण मांगा। सीएमओ ने ऑडियो को फर्जी बताया, लेकिन डीएम ने उन्हें तुरंत बैठक से बाहर कर जांच कराने का निर्देश दे दिया।

पहले भी मिल चुके थे सख्त संकेत

फरवरी में डीएम ने सीएमओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था, जहां सीएमओ समेत कई अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। बाद में सीएचसी और पीएचसी में निरीक्षण के दौरान भी कई अनियमितताएं सामने आईं। उसी वक्त से डीएम और सीएमओ के रिश्तों में खटास शुरू हो गई थी।

विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष की सिफारिशों के बावजूद सरकार ने कड़ा संदेश देते हुए सीएमओ को सस्पेंड कर दिया है। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि प्रशासनिक अनुशासन में किसी भी स्तर पर चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे उसके पीछे कोई भी राजनीतिक समर्थन क्यों न हो।

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