
देश के अलग अलग हिस्सों में छोटे व्यापारियों खासकर खाने पीने का सामान बेचने वाले दुकानदारों के बीच एक अलग ही ट्रेंड चल रहा है कई दुकान अपना धर्म छुपा कर और दूसरे धर्म के देवी देवताओं और नाम की आड़ लेकर धंधा करने लगे हैं। कोई अपनी दुकान का नाम हिंदू देवी देवताओं के नाम पर रख लेता है तो कोई तिलक लगाकर और भगवा गमछा पहनकर यात्रियों को गुमराह करता है। हिंदू देवी देवताओं के नाम पर दुकान का नाम रखकर यहाँ नॉन वेज परोसा जाता है। इसको लेकर लंबे समय से विवाद भी चल रहा है, खासकर ऐसे दुकानदारों से उन लोगों को तब ज्यादा समस्या होती है जब वह अपने धार्मिक आयोजनों जैसे कावड़ यात्रा पर निकलते हैं, जिस दौरान भक्त अपने खान पान का विशेष ध्यान रखते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें खाना खाने के बाद पता चलता है कि जिन देवी देवताओं के नाम पर दुकान चल रही थी, वह दूसरे धर्म या संप्रदाय का था।इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी ने कांवड़ यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने-पीने की दुकानों पर संचालकों-मालिकों का नाम और पहचान बतानी होगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय कांवर यात्रियों की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया है। अब, हर भोजनालय, चाहे वह रेस्तरां हो, सड़क किनारे ढाबा हो, या यहां तक कि खाने की गाड़ी भी हो, उसे मालिक का नाम प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों पर प्रमुखता से नाम प्रदर्शित करने पर देशव्यापी बहस छिड़ चुकी है। एक तरफ नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है, दूसरी तरफ दुकानों के बाहर नाम प्रदर्शित करने का सिलसिला जारी है। वहीं सीएम योगी ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कह दिया है कि पूरे प्रदेश में कांवड़ मार्गों पर दुकानदारों को नाम लिखना होगा। इससे सहयोगी दल भी खफा हो गए हैं।विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ-साथ सहयोगी पाटियों की भी नाराजगी झेलनी पड़ रही है। वहीं जेडीयू से लेकर आरएलडी तक की भी नकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई हैं।साथी दलों का कहना है की जो प्रतिबंध लगाए गए हैं। वे प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारे का उल्लंघन हैं। उत्तर प्रदेश में प्रशासन को दुकानदारों को अपनी दुकान पर अपना नाम और धर्म लिखने का निर्देश देना जाति और सम्प्रदाय को बढ़ावा देने वाला कदम है। प्रशासन इसे वापस ले। यह गैर संवैधानिक निर्णय है। ये आदेश बिहार, राजस्थान और झारखंड में लागू नहीं है। अच्छा होगा कि इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।दूसरी तरफ विरोधी दाल भी आक्रामक है और कह रहे है की जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते हैं, उसके नाम से क्या पता चलेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय स्वतः संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर उचित दंडात्मक कार्रवाई करे। ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं।