
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के एक दांव से देशभर में वन नेशन, वन इलेक्शन पर चर्चा और बहस शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितम्बर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया है और निर्देश दिया है कि संसद सत्र के दौरान सभी बड़े अधिकारी दिल्ली में ही रहें।
अमूमन सरकार ऐसे निर्देश किसी बड़ी घटना के संदर्भ में ही देती है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्षी गठबंधन INDIA को कमजोर करने के लिए बड़ी सियासी चाल चल सकती है। ऐसी सियासी रणनीति में वन नेशन, वन इलेक्शन विपक्षी एकता को तोड़ने में कारगर हो सकती है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ क्षेत्रीय दलों के लिए क्यों काल?
अगर देश में एक ही समय लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होते हैं तो इस बात की गहरी और बड़ी आशंका है कि चुनावों में स्थानीय मुद्दे कमजोर पड़ जाएंगे। आम तौर पर लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनावों के मुद्दे अलग-अलग होते हैं। लोकसभा चुनावों में जहां राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहते हैं, वहीं विधानसभा के चुनावों में स्थानीय मुद्दे और स्थानीय समीकरण काम करते हैं।
राष्ट्रीय पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दे उठाती हैं, जबकि स्थानीय और क्षेत्रीय पार्टियां स्थानीय मुद्दे उठाती हैं। ऐसा भी अक्सर होता है कि एक ही पार्टी के लिए दोनों चुनावों में मुद्दे और चुनावी वादे अलग-अलग होते हैं। ऐसे में यह संभावना है कि एक साथ देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने से क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों को मजबूती से नहीं उठा पाएंगे।
चुनावी खर्च में भी क्षेत्रीय दल फिसड्डी होंगे
इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्रीय दल चुनावी खर्च और चुनावी रणनीति के मामले में राष्ट्रीय दलों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे। विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों और स्थानीय मतदाताओं से गहराई से जुड़े होते हैं। इसलिए, एक साथ चुनाव होने की दशा में सभी दलों को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग घोषणा पत्र, चुनावी वादे और चुनावी रणनीतियां बनानी होंगी। इसमें बहुत फंड की जरूरत होगी, जिसमें क्षेत्रीय दल कमजोर साबित हो सकते हैं।
बीजेपी-कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है प्लान
जानकारों के मुताबिक राष्ट्रीय पार्टियों खासकर बीजेपी और कांग्रेस के लिए वन नेशन वन इलेक्शन का गेम प्लान फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि उसे देशभर में एक ही मशक्कत करनी पड़ सकती है। साथ ही उसके अधिकांश मुद्दे राष्ट्रव्यापी और बीजेपी-कांग्रेस की एक-दसरे की काट वाले होंगे लेकिन दूसरे हाथ कांग्रेस को इस बात का भी डर रहेगा कि उसके सहयोगी दल इससे नाराज हो सकते हैं। बहरहाल, किसी भी दल की तरफ से इस पर कोई औपचारिक बयान नहीं आ सका है।
INDIA गठबंधन के लिए क्यों खतरा?
विपक्षी गठबंधन INDIA में अभी 28 दल शामिल हैं। इनमें कांग्रेस, माकपा और आप ही राष्ट्रीय पार्टियां हैं। शेष 25 सभी क्षेत्रीय और स्थानीय दल हैं। माकपा और आप को भी भले ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला हुआ हो लेकिन कमोबेश वे दोनों भी एक क्षेत्रीय पार्टी की हैसियत में ही हैं। इसके अलावा इस गठबंधन के दल भले ही केंद्र के खिलाफ लड़ाई में एकजुट नजर आ रहे हों लेकिन राज्यों में उनके बीच आपसी खींचतान मची हुई है।