
भारत में सबसे सीनियर अफगान राजनयिक ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, पिछले महीने मुंबई हवाई अड्डे पर उन्हें हिरासत में लिया गया था। जाकिया वारदाक पर दुबई से लगभग 2.2 मिलियन डॉलर मूल्य के 25 किलोग्राम सोने की तस्करी के प्रयास का आरोप लगा।इस तरह की खबरों के बीच आखिरकार आज उन्हें अपना पद छोड़ दिया। वारदाक को 3 साल पहले मुंबई में महावाणिज्य दूत के रूप में भारत भेजा गया था। पिछले साल के अंत से नई दिल्ली में वह कार्यवाहक राजदूत के रूप में काम कर रही थीं।जाकिया वारदाक ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके कहा, ‘कई तरह के व्यक्तिगत हमलों और मानहानि के कारण मैं पद छोड़ रही हूं। ऐसी स्थिति ने मेरी भूमिका को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की मेरी क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।’ उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि बेहद अफसोस के साथ मैंने यह फैसला लिया है। पिछले साल से ही मुझे व्यक्तिगत हमलों और मानहानि का सामना करना पड़ रहा है। मेरे ही नहीं, बल्कि परिवार के करीबी लोगों के साथ भी ऐसा हुआ है।
DRI अधिकारियों को मिली थी विश्वसनीय जानकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, जाकिया वारदाक को गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्हें राजनयिक छूट है। सामान्य तौर पर अगर तस्करी किए गए सोने की कीमत 1 करोड़ रुपए से ज्यादा हो तो संदिग्ध को गिरफ्तार कर आपराधिक मुकदमा चलाया जाता है। वारदाक के पास इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान की ओर से जारी किया गया राजनयिक पासपोर्ट है। जब वह एयरपोर्ट से बाहर निकलने वाली थीं, तभी DRI अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि वह नियमित तौर पर इन गतिविधियों को अंजाम दे रही थीं। साथ ही, DRI अधिकारियों को उनके बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली थी जिसके बाद जांच शुरू की गई।