यूपी में जनजातीय गौरव को मिली नई पहचान, CM योगी ने बदली वंचित समाज की तस्वीर, 11 लाख से अधिक लोगों का जीवन हुआ सार्थक

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जनजातीय समाज के जीवन में आए बदलाव को सिर्फ योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना की एक बड़ी कहानी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच हमेशा यही रही है कि विकास तभी सार्थक है जब वंचितों को वरीयता मिले और ‘अंत्योदय से सर्वोदय’ का रास्ता खुले। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन समुदायों को योगी सरकार ने न केवल मुख्यधारा में जगह दिलाई, बल्कि उनकी परंपराओं, जरूरतों और सपनों को शासन की प्राथमिकता बनाया है।

11 लाख से अधिक लोगों के जीवन में आया परिवर्तन

प्रदेश में थारु, बुक्सा, भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, बैगा, सहरिया, मुसहर और चेरो जैसी जनजातियों के 11 लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदलने के लिए सरकार ने कई योजनाएं जमीन पर उतारी हैं:

  • आवासीय अधिकार: वनाधिकार अधिनियम के तहत आवासीय अधिकार दिए गए।
  • पक्के घर: मुख्यमंत्री आवास योजना से वनवासियों को पक्के घर मिले।
  • बुनियादी सुविधाएँ: पीएम जनमन योजना के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को सीधे उनके द्वार तक पहुंचाया गया।
  • मिसाल पेश: खासकर बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को हर सुविधा से संतृप्त कर एक नई मिसाल पेश की गई है।

जनजातीय इलाकों में बदली विकास की तस्वीर

‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘धरती आबा जनभागीदारी अभियान’ ने जनजातीय इलाकों में विकास की असली तस्वीर बदल दी है। 26 जिलों के 517 गांवों तक पहुंचकर सरकार ने कनेक्टिविटी से लेकर आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला, जनधन, किसान सम्मान निधि और विश्वकर्मा जैसी योजनाओं का सैचुरेशन (Saturation) कराया है। सोनभद्र, ललितपुर, कुशीनगर, बलरामपुर से लेकर बिजनौर तक इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लगातार बढ़े हैं।

संस्कृति को संजोने पर जोर और आत्मनिर्भरता की राह

जनजातीय संस्कृति को संजोने पर भी सरकार ने भरपूर जोर दिया है:

  • संग्रहालय: बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू संग्रहालय स्थापित हुआ और मिर्जापुर, सोनभद्र, महराजगंज में नए संग्रहालयों पर तेजी से काम चल रहा है।
  • आत्मनिर्भरता: थारू समुदाय की कला और कौशल को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई। इससे जुड़े 371 समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड देकर आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई है।

शिक्षा को बनाया भविष्य का आधार

शिक्षा को जनजातीय उन्नति का आधार बनाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल, सर्वोदय छात्रावास और आश्रम पद्धति विद्यालयों में बच्चों को पूरी सुविधा मिल रही है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर के एकलव्य विद्यालयों ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को नई दिशा दी है।

आरक्षण और प्रशिक्षण से बढ़ी भागीदारी

मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि विकास की असली कसौटी भागीदारी है।

  • पुलिस भर्ती: पुलिस भर्ती में आरक्षित सभी सीटें पूरी तरह भरना इसी परिवर्तन का संकेत है।
  • प्रशिक्षण: परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र योजना से 700 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन, साढ़े 06 हजार युवाओं को प्रशिक्षण और आठ उच्चस्तरीय केंद्रों की स्थापना ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं।

विमुक्त और घुमंतू समुदायों (नट, बंजारा, सांसी, कंजर, कालबेलिया आदि) को भी सरकार ने बराबर महत्व दिया है, जिनके लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय, 9 सर्वोदय विद्यालय और अनेक छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *