Valmiki Jayanti 2026: बिठूर के वाल्मीकि आश्रम पहुंचे CM योगी, प्राचीन शिवलिंग की पूजा कर सीता कुटिया में किए दर्शन

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कानपुर के बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। आश्रम में दो महंतों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजन संपन्न कराया, जबकि लव-कुश आश्रम स्थित गुरुकुल के सात बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इससे आश्रम का माहौल भक्तिमय हो गया।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन शिवलिंग की भी पूजा की। धार्मिक मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि इस शिवलिंग की आराधना किया करते थे। इसके बाद उन्होंने सीता कुटिया में दर्शन किए और परिसर में मौजूद प्राचीन पीलू के वृक्ष के सामने भी नमन किया। धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री नानाराव पेशवा पार्क पहुंचे, जहां आयोजित जनसभा में उन्होंने क्षेत्र के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

प्राचीन शिवलिंग की पूजा कर सीता कुटिया में किए दर्शन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पहुंचकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। उन्होंने आश्रम के प्राचीन शिवलिंग पर पूजन किया और इसके बाद सीता कुटिया में जाकर दर्शन किए। इस दौरान आश्रम के महंतों ने पूजा संपन्न कराई और गुरुकुल के सात बटुकों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिठूर का यह आश्रम माता सीता के वनवास, महर्षि वाल्मीकि की तपस्या और लव-कुश के जन्म से जुड़ा हुआ है। महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान का रामायण परंपरा में विशेष महत्व है। यही वजह है कि वाल्मीकि जयंती जैसे अवसरों पर इस आश्रम में धार्मिक गतिविधियों और दर्शन का विशेष महत्व रहता है।

महर्षि वाल्मीकि आश्रम के प्राचीन पीलू वृक्ष के भी किए दर्शन

बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम परिसर में मौजूद प्राचीन पीलू का वृक्ष भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि इस वृक्ष के नीचे बैठकर जाप और तपस्या किया करते थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रम में पूजा-अर्चना के दौरान इस प्राचीन वृक्ष के भी दर्शन किए। महर्षि वाल्मीकि से जुड़ी मान्यताओं और रामायण के प्रसंगों के कारण आश्रम परिसर में स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों का अपना विशेष महत्व माना जाता है।

रामायण की रचना और माता सीता के आश्रय से जुड़ा है बिठूर

कानपुर के बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम रामायण की परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, महर्षि वाल्मीकि ने इसी स्थान पर रामायण की रचना की थी। मान्यता यह भी है कि वनवास के दौरान माता सीता को यहां आश्रय मिला था और लव-कुश का जन्म भी इसी स्थान पर हुआ था।

महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और लव-कुश से जुड़े इन प्रसंगों के कारण बिठूर का यह आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यहां पहुंचना और धार्मिक स्थलों पर दर्शन करना इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

नानाराव पेशवा पार्क में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास

महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नानाराव पेशवा पार्क पहुंचे। यहां आयोजित जनसभा के दौरान उन्होंने क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का लोकार्पण किया और नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

इस तरह वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री का बिठूर दौरा धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास से जुड़े आयोजनों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा।

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