वाराणसी की गंगा नदी में इफ्तार पार्टी और कथित तौर पर चिकन की हड्डियां फेंकने के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद छह और आरोपियों को जमानत दे दी है। सभी आरोपियों ने अदालत में एफिडेविट दाखिल कर माफी मांगी थी, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
इससे पहले वाराणसी की निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। बाद में सभी ने राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने यह आदेश जारी किया।
इससे पहले 8 आरोपियों को भी मिल चुकी है राहत
इस मामले में 15 मई को हाईकोर्ट पहले ही आठ आरोपियों को जमानत दे चुका था। पुलिस ने पूरे मामले में कुल 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। अब सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है।
रमजान के दौरान नाव पर हुई थी इफ्तार पार्टी
पूरा मामला रमजान के दौरान वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ मुस्लिम युवक नाव में बैठकर इफ्तार करते दिखाई दिए थे।
आरोप लगाया गया कि पार्टी के दौरान चिकन बिरयानी खाने के बाद उसकी हड्डियां गंगा नदी में फेंकी गईं। इसके बाद मामला तेजी से विवादों में आ गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे पवित्र गंगा नदी को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताया था।
भाजयुमो नेता की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस
इस मामले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जयसवाल की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। लिखित तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने सभी 14 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295A समेत अन्य धाराओं और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि यह कार्य जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
मामले को लेकर पहले भी बढ़ चुका है विवाद
गंगा नदी से जुड़े इस मामले ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी काफी चर्चा बटोरी थी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। वहीं अब हाईकोर्ट से सभी आरोपियों को जमानत मिलने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।