यूपी में अब जेब में चलेगा सचिवालय, सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म, स्मार्टफोन से मिल रहीं 600 से ज्यादा सुविधाएं

उत्तर प्रदेश में सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। योगी सरकार द्वारा ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत अपनाई गई ‘मोबाइल गवर्नेंस’ (m-Governance) की नीति ने आम जनता को दफ्तरों की दौड़ और लंबी कतारों से मुक्ति दिला दी है। अब प्रदेश के नागरिकों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना बीते कल की बात हो गई है, क्योंकि सरकार ने पूरे सचिवालय को आम आदमी के स्मार्टफोन में समेट दिया है। इस पहल से सरकारी सेवाएं अब लोगों की उंगलियों पर उपलब्ध हैं।

एक क्लिक पर 600 से अधिक सेवाएं

नागरिकों को सहूलियत देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘जनसुनवाई’, ‘एम-कवच’, और ‘यूपी कॉप’ (UPCOP) जैसे कई महत्वपूर्ण मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं। मौजूदा समय में राज्य सरकार की 600 से ज्यादा सेवाएं मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए जनता तक पहुंच रही हैं। चाहे आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना हो, घर बैठे बिजली का बिल भरना हो, या फिर पुलिस में ई-एफ़आईआर (e-FIR) दर्ज करानी हो, ये सभी जरूरी काम अब महज कुछ ही मिनटों में मोबाइल के जरिए निपटाए जा रहे हैं।

पारदर्शिता और त्वरित समाधान

मोबाइल गवर्नेंस के लागू होने से न सिर्फ सरकारी काम की गति बढ़ी है, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी आई है।

  • शिकायत निवारण: ‘जनसुनवाई-IGRS’ पोर्टल और ऐप के जरिए अब तक करोड़ों शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। सबसे अच्छी बात यह है कि शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति सीधे अपने मोबाइल पर ट्रैक कर सकता है।
  • डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): सरकारी योजनाओं का लाभ अब बिचौलियों के बिना सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है, जिसकी सूचना उन्हें तुरंत एसएमएस (SMS) के जरिए मोबाइल पर मिल जाती है।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: ‘आभा’ (ABHA) ऐप के जरिए हेल्थ रिकॉर्ड्स और ‘दीक्षा’ पोर्टल के जरिए पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी सामग्री अब 24 घंटे मोबाइल पर उपलब्ध है।

AI चैटबॉट और डेटा सुरक्षा पर जोर

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अब मोबाइल गवर्नेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उपयोग कर रही है। कई विभागों ने अपने ‘चैटबॉट’ शुरू कर दिए हैं, जहां लोग अपनी स्थानीय भाषा में सवाल पूछकर तुरंत जवाब पा सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जिन्हें जटिल सरकारी फॉर्म भरने में परेशानी होती थी। इसके साथ ही, डेटा सुरक्षा को लेकर भी सरकार सजग है। नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए सभी सरकारी ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और डेटा एन्क्रिप्शन जैसी आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

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