ट्रंप का गुड न्यूज़ दावा, क्या शुक्रवार को होगी US-Iran शांति वार्ता? तेहरान ने तुरंत कर दिया खारिज

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि बातचीत को लेकर “गुड न्यूज़” है और संभावना जताई कि शुक्रवार को दोनों देशों के बीच वार्ता हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीजफायर को लेकर मतभेद, समुद्री टकराव और कूटनीतिक गतिरोध लगातार जारी हैं।

हालांकि ट्रंप के इस संकेत को कूटनीतिक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी आधिकारिक कार्यक्रम या एजेंडे की पुष्टि नहीं की गई है। मौजूदा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं, ऐसे में अगर शुक्रवार को बातचीत होती है तो यह तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

36-72 घंटे में वार्ता की अटकलें

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अगले 36 से 72 घंटों के भीतर शुरू हो सकती है। इससे उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रक्रिया फिर से पटरी पर लौट सकती है। लेकिन इसी बीच ईरान की ओर से इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया गया है।

ईरान का साफ इनकार, दावों को बताया “झूठ”

ईरान से जुड़ी तसनीम न्यूज एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ट्रंप के दावे को “झूठ” बताया और स्पष्ट किया कि शुक्रवार तक किसी भी वार्ता की कोई योजना नहीं है। ईरान के इस बयान के बाद स्थिति और ज्यादा उलझती नजर आ रही है, जहां एक तरफ अमेरिका बातचीत के संकेत दे रहा है तो दूसरी तरफ तेहरान पूरी तरह इनकार कर रहा है।

कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति

ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय दिया जब उन्होंने पहले ईरान के साथ सीजफायर को बढ़ाने का फैसला लिया था, ताकि तेहरान को वार्ता में शामिल होने का समय मिल सके। हालांकि इस फैसले पर ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल अपनी रणनीति में लचीलापन बनाए हुए है। वॉशिंगटन एक तरफ कूटनीतिक विकल्प खुले रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव भी जारी रखना चाहता है।

पाकिस्तान और सलाहकारों की भूमिका

ट्रंप ने अपनी इस रणनीति का श्रेय पाकिस्तान और अपने करीबी सलाहकारों को दिया है, जो इस संकट में मध्यस्थता और बातचीत की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा हालात “रुककर देखने” की रणनीति को दर्शाते हैं, जिसमें बातचीत के रास्ते खुले रखे गए हैं और साथ ही दबाव भी बरकरार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *