वेनेजुएला में आधी रात एयरस्ट्राइक, राष्ट्रपति मादुरो पत्नी समेत गिरफ्तार, ट्रंप ने किया दावा

काराकास/वॉशिंगटन: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच चल रही तनातनी अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। अमेरिका ने वेनेजुएला में आधी रात को कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक (Airstrike) की है। हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

कहाँ-कहाँ हुए हमले?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने राजधानी काराकास, मिरांडा, अरगुआ और ला गुइरा में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

आखिर मादुरो के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप? (3 मुख्य वजहें)

डोनाल्ड ट्रंप और निकोलस मादुरो के बीच की दुश्मनी पुरानी है। इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जा रहे हैं:

  1. ड्रग्स और कोकीन की तस्करी: ट्रंप प्रशासन मादुरो को ‘ड्रग तस्कर’ मानता है। उन पर अमेरिका में कोकीन की अवैध सप्लाई और नार्को-टेररिज्म का आरोप है। ट्रंप ने उनकी गिरफ्तारी पर 5 करोड़ डॉलर (50 Million USD) का इनाम भी घोषित किया था।
  2. अवैध घुसपैठ (Illegal Immigration): 2013 के बाद वेनेजुएला में आए आर्थिक संकट के कारण लाखों लोग अमेरिका भाग आए। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका में अवैध प्रवासियों की भीड़ के लिए मादुरो की नीतियां जिम्मेदार हैं।
  3. तेल पर नजर: मादुरो का आरोप रहा है कि अमेरिका उनके ऊपर ड्रग्स के झूठे आरोप लगाकर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार (Oil Reserves) पर कब्जा करना चाहता है। अमेरिका पहले भी प्रतिबंधित तेल ले जा रहे कई टैंकरों को जब्त कर चुका है।

अब कौन संभालेगा वेनेजुएला की सत्ता?

मादुरो की कथित गिरफ्तारी के बाद सत्ता को लेकर असमंजस की स्थिति है:

  • संविधान के मुताबिक: नियमतः सत्ता वाइस प्रेसिडेंट डेलसी रोड्रिग्ज के हाथ में जानी चाहिए।
  • अमेरिका/विपक्ष की नजर में: अमेरिका मादुरो को वैध राष्ट्रपति नहीं मानता। विपक्ष और अमेरिका निर्वासित नेता एडमंडो गोंजालेज को असली राष्ट्रपति मानते हैं।

नोबेल विजेता मारिया कोरीना का जिक्र

इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष की मुख्य नेता मारिया कोरीना मचोडा का नाम भी अहम है।

  • मादुरो ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
  • अक्टूबर 2025 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
  • मादुरो के डर से वह छिपते हुए समंदर के रास्ते ओस्लो (नॉर्वे) पहुंची थीं।

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