UPI पेमेंट पर 0.5 फीसदी टैक्स या चार्ज लगाए जाने की चर्चाओं के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर फिलहाल न तो कोई सरकारी टैक्स लगाया गया है और न ही 0.5 फीसदी शुल्क तय किया गया है। उन्होंने 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 रुपये पर 50 रुपये वसूले जाने की बात को काल्पनिक 0.5 फीसदी दर के आधार पर की गई गणना बताया है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर 2026 को गजट अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत RuPay से जुड़े डेबिट कार्ड और 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन को ऐसी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान व्यवस्था के रूप में निर्धारित किया गया है, जिस पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकते। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी चार्ज लागू हो गया है। अधिसूचना में 2,000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजेक्शन के लिए ऐसी कोई 0.5 फीसदी दर निर्धारित नहीं की गई है।
5,000 पर 25 और 10,000 पर 50 रुपये देने की बात कितनी सही?
अमित मालवीय ने कांग्रेस के उस दावे पर सवाल उठाया है, जिसमें 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.5 फीसदी शुल्क की बात कही गई है। उनके मुताबिक यदि केवल उदाहरण के तौर पर 0.5 फीसदी दर मान ली जाए तो 5,000 रुपये पर 25 रुपये और 10,000 रुपये पर 50 रुपये की गणना निकलती है। लेकिन ये आंकड़े किसी सरकारी शुल्क सूची का हिस्सा नहीं हैं।
हालांकि, मौजूदा नियमों में हुए बदलाव के बाद भविष्य में बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू किए जाने की संभावना को लेकर चर्चा जरूर शुरू हुई है। 15 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक पेमेंट कंपनियों और बैंकों के साथ 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर संभावित शुल्क को लेकर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट में करीब 0.4 फीसदी की संभावित दर का जिक्र किया गया है, लेकिन यह अभी सरकार की ओर से तय की गई अंतिम दर नहीं है।
आम UPI यूजर को अभी देना होगा कोई चार्ज?
आम UPI यूजर्स के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाला UPI भुगतान मुफ्त है। उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को UPI के जरिए 5,000 या 10,000 रुपये भेजने पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स कटने की बात फिलहाल सही नहीं है।
भविष्य में यदि MDR की व्यवस्था लागू की जाती है तो उसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन तक सीमित रहने की संभावना बताई गई है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि इसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की बात नहीं है। यानी सामान्य P2P UPI ट्रांजेक्शन को लेकर अभी 0.5 फीसदी टैक्स की कोई व्यवस्था लागू नहीं हुई है।
UPI को फ्री रखने के लिए सरकार देती है इंसेंटिव
UPI और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार पहले से इंसेंटिव स्कीम चला रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार FY2021-22 से FY2024-25 के बीच UPI और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए सरकार ने करीब 8,730 करोड़ रुपये का इंसेंटिव सपोर्ट दिया था।
अमित मालवीय ने भी अपने बयान में सरकार की ओर से दिए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहनों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि UPI को मुफ्त बनाए रखने और इसके पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
Tax नहीं, बड़े Merchant Payment पर MDR है असली मुद्दा
UPI विवाद को समझने के लिए Tax और MDR के बीच अंतर जानना जरूरी है। MDR यानी Merchant Discount Rate कोई सामान्य उपभोक्ता टैक्स नहीं है। यह भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से जुड़े भुगतान नेटवर्क और वित्तीय संस्थानों के बीच लगने वाला शुल्क हो सकता है।
वर्तमान व्यवस्था में 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर शुल्क को लेकर सरकार ने स्पष्ट सुरक्षा दी है। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर भविष्य में MDR लागू करने को लेकर चर्चा चल रही है। अभी इसकी अंतिम दर और इसे लागू करने का तरीका तय नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल 2,000 रुपये से ज्यादा के हर UPI पेमेंट पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स लगने का दावा सही नहीं है।