उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने की समय सीमा बढ़ा दी गई है. चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख अब 6 मार्च 2026 कर दी है. पहले यह समय सीमा 6 फरवरी तक थी. अब लोग एक महीने और फॉर्म 6, 7 और 8 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं, संशोधन करा सकते हैं या नाम कटवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
राजनीतिक दलों की मांग पर बढ़ा समय
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) उत्तर प्रदेश नवदीप रिणवा ने इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 27 जनवरी को हुई बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने समय बढ़ाने की मांग की थी. इसी को देखते हुए दावे और आपत्तियों के लिए समय एक महीने बढ़ा दिया गया है. अब 6 मार्च तक आवेदन लिए जाएंगे. इसके बाद चुनाव आयोग 27 मार्च तक इन सभी दावे-आपत्तियों का निस्तारण करेगा और अंत में 10 अप्रैल को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.
करोड़ों नोटिस और लाखों सुनवाई
सीईओ ने बताया कि राज्य में 27 अक्टूबर से विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और 6 जनवरी को ड्राफ्ट लिस्ट जारी की गई थी. सुधार प्रक्रिया के तहत अब तक बड़े पैमाने पर काम हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक 2 करोड़ 37 लाख नोटिस भेजे जा चुके हैं. करीब 30 लाख 30 हजार मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल काम का 9.2 प्रतिशत है. उन्होंने बताया कि पिछली सूची में 1 करोड़ 4 लाख वोटर्स की मैपिंग नहीं थी और 2 करोड़ 22 लाख वोटर्स के डेटा में तार्किक विसंगतियां थीं, जिन्हें सुधारा जा रहा है.
फॉर्म-7 भरने के लिए बनाए गए सख्त नियम
वोट काटने को लेकर हो रहे विवादों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म-7 (नाम हटाने का फॉर्म) को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने बताया कि नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भरा जाता है और इसे सिर्फ रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है. फॉर्म में नाम कटवाने का ठोस कारण और पूरी जानकारी देनी होगी. आयोग ने साफ किया है कि एक साथ थोक में फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाएंगे. एक व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही भर सकता है.