लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। नए साल के मौके पर समाजवादी पार्टी (SP) ने लखनऊ में ‘बाटी-चोखा’ भोज का आयोजन कर बीजेपी की कथित ‘ब्राह्मण पॉलिटिक्स’ का जवाब देने की कोशिश की है। इसे अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का ही एक हिस्सा माना जा रहा है।
अखिलेश का ‘बाटी-चोखा’ डिप्लोमेसी
बीजेपी के कुछ ब्राह्मण विधायकों की अलग बैठक की खबरों के बीच सपा ने ‘बाटी-चोखा’ पार्टी आयोजित की।
- संदेश: अखिलेश यादव ने इसके जरिए ‘सामाजिक एकता’ का संदेश दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा में सब मिलजुल कर खाते हैं, जबकि बीजेपी में गुटबाजी चल रही है।
- शिवपाल का ऑफर: चाचा शिवपाल यादव ने बड़ा दांव चलते हुए कहा, “बीजेपी में जाति के आधार पर बात होती है। जो ब्राह्मण समाज के लोग वहां नाराज हैं, वे सपा में आएं, उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा।”
क्यों अहम है ब्राह्मण वोट? (जातिगत आंकड़े)
यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक (करीब 10-12%) किंगमेकर की भूमिका निभाता है। सपा की नजर इसी वोट बैंक में सेंध लगाने पर है, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी का माना जाता है।
2022 विधानसभा चुनाव का ट्रेंड:
- ब्राह्मण: 89% वोट बीजेपी को मिले।
- ठाकुर: 87% वोट बीजेपी को मिले।
- यादव: 83% वोट सपा+ को मिले।
- मुस्लिम: 79% वोट सपा+ को मिले।
बीजेपी की ताकत: यूपी बीजेपी में संगठन और सत्ता में ब्राह्मणों की अच्छी पकड़ है। उनके पास 46 ब्राह्मण विधायक, 7 मंत्री और 1 डिप्टी सीएम हैं। राज्य की 60 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण वोटर निर्णायक हैं।
वार-पलटवार
- अखिलेश यादव: “बीजेपी हार मान चुकी है, 2027 में सपा सरकार बनाएगी।”
- ओपी राजभर (NDA): “जनता आज भी एनडीए के साथ है, विपक्ष मुंगेरी लाल के सपने देख रहा है।”
- बीजेपी: “अखिलेश को अपने विधायकों के टूटने का डर सता रहा है, इसलिए ऐसे आयोजन कर रहे हैं।”
सपा की रणनीति साफ है— अपने कोर वोट बैंक (Yadav-Muslim) को बचाए रखना और PDA के जरिए ओबीसी-दलितों को जोड़ना, साथ ही बीजेपी के नाराज सवर्णों (खासकर ब्राह्मणों) को अपने पाले में लाना।