लेखपाल भर्ती में आरक्षण का गणित बिगड़ा, सीएम योगी की सख्ती के बाद राजस्व परिषद का बड़ा कदम, UPSSSC से मांगी संशोधित सूची

उत्तर प्रदेश में 7,994 लेखपाल पदों पर होने वाली भर्ती अब आरक्षण विवाद के घेरे में आ गई है। नोटिफिकेशन में ओबीसी (OBC) वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकार से कम सीटें मिलने की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। सीएम की सीधी चेतावनी के बाद अब राजस्व परिषद एक्शन में आ गया है और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) को पत्र लिखकर एक हफ्ते के भीतर पदों की संशोधित और पारदर्शी सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा विवाद? क्यों उठ रहे हैं आरक्षण पर सवाल?

विवाद की शुरुआत 16 दिसंबर को जारी हुए भर्ती नोटिफिकेशन के साथ हुई। नियमानुसार, सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण मिलना अनिवार्य है। लेखपाल के कुल 7,994 पदों के हिसाब से ओबीसी वर्ग के खाते में लगभग 2,158 सीटें आनी चाहिए थीं। लेकिन नोटिफिकेशन में इस वर्ग के लिए केवल 1,441 पद ही आवंटित किए गए, जो कुल भर्ती का मात्र 18% ही बैठता है। आंकड़ों के इसी अंतर ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।

सीएम योगी की चेतावनी: “संविधान और रोस्टर में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं”

मामला गंभीर होते देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार रात अधिकारियों के साथ हाई-लेवल बैठक की। उन्होंने आयोग के चेयरमैन और राजस्व परिषद के अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि हर वर्ग को उसका पूरा हक मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए:

“संविधान के नियमों और आरक्षण के रोस्टर को हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। ओबीसी को 27%, एससी को 21% और एसटी को 2% वर्टिकल आरक्षण अक्षरशः लागू हो। साथ ही दिव्यांग, महिला और पूर्व सैनिकों का हॉरिजॉन्टल आरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।”

राजभर और अखिलेश ने भी सरकार को घेरा

आरक्षण के आंकड़ों में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने भी आवाज उठाई। 17 दिसंबर को कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुधार की मांग की थी। वहीं, 18 दिसंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि सरकार पिछड़ों का हक छीनने की कोशिश कर रही है। चौतरफा दबाव के बाद 19 दिसंबर को राजस्व परिषद आयुक्त ने UPSSSC को पत्र भेजकर पदों की नई सूची तैयार करने को कहा है।

अब आगे क्या होगा?

राजस्व परिषद के पत्र के बाद अब UPSSSC को लेखपाल पदों के अधियाचन की दोबारा समीक्षा करनी होगी। आयोग को एक सप्ताह के भीतर यह सुनिश्चित करना होगा कि विज्ञापन में आरक्षण का रोस्टर पूरी तरह सही हो। इस संशोधित सूची के आने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रक्रिया को इतना पारदर्शी बनाया जाए कि भविष्य में इसे लेकर कोई कानूनी पेच न फंसे।

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