UP News: योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण के लिए खोला खजाना, 69.16 करोड़ रुपये का बजट मंजूर

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और बेहतर देखभाल के लिए योगी सरकार ने वित्तीय सहायता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गोवंश संरक्षण के मद में 69.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें से 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग को जारी कर दी गई है। पिछले नौ वर्षों में इस मद में मंडी परिषद का वार्षिक वित्तीय प्रावधान 4.51 करोड़ रुपये से बढ़कर 69.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 15 गुने से अधिक की वृद्धि है।

मंडी परिषद की आय से हो रही गोवंश की देखभाल

योगी सरकार की इस व्यवस्था के तहत कृषि मंडियों से होने वाली आय का एक हिस्सा निराश्रित गोवंश की सेवा और देखभाल पर खर्च किया जा रहा है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद अपनी कुल आय का तीन प्रतिशत हिस्सा गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराती है। इस राशि का इस्तेमाल पंजीकृत गोशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए चारा, आश्रय, टीकाकरण, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाता है। इस पहल के जरिए कृषि विपणन से प्राप्त राजस्व को गोवंश संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व से जोड़ा गया है।

नीतिगत फैसले के बाद बढ़ा गोवंश संरक्षण का बजट

गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद से मिलने वाले अनुदान में वृद्धि की प्रक्रिया वर्ष 2019 में तेज हुई। उस दौरान गोसेवा आयोग को अनुदान देने का प्रावधान दो प्रतिशत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंडी परिषद के संचालक मंडल ने परिषद की कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को देने का निर्णय लिया।

इस व्यवस्था के तहत अनुदान दो किस्तों में जारी किया जाता है। पहली किस्त में डेढ़ प्रतिशत राशि दी जाती है, जबकि शेष डेढ़ प्रतिशत राशि पहली किस्त के उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद जारी की जाती है। इस प्रक्रिया के जरिए गोवंश संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई गई है।

नौ वर्षों में लगातार बढ़ा आर्थिक सहयोग

मंडी परिषद के आंकड़ों के अनुसार, गोवंश संरक्षण के लिए दिए जाने वाले अनुदान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 31.69 करोड़ रुपये और 2023-24 में 45.66 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। वहीं, 2024-25 में यह राशि बढ़कर 51.50 करोड़ रुपये और 2025-26 में 59.14 करोड़ रुपये हो गई।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 69.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बढ़ते बजट को निराश्रित गोवंश के संरक्षण और गोशालाओं में उपलब्ध सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

गो आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की भी तैयारी

गोवंश संरक्षण के साथ-साथ योगी सरकार गो आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दे रही है। इसके तहत दूध, गोबर और कम्पोस्ट जैसे उत्पादों की बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर उसे गोशालाओं के संचालन में इस्तेमाल करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे गो आश्रय स्थलों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने और लंबे समय तक उनके संचालन को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।

मंडी परिषद किसानों के साथ गोवंश संरक्षण में भी दे रही योगदान

राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मंडी परिषद किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए भी आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। इससे गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।

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