उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी दलित स्वाभिमान, आरक्षण और रोजगार जैसे मुद्दों को अपने चुनावी अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाने की तैयारी में है। इन मुद्दों के जरिए बसपा उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को घेरने के साथ अपने पारंपरिक मतदाताओं को भी एकजुट करना चाहती है। इस रणनीति की शुरुआत राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद बुलंदशहर के अनूपशहर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए कर चुके हैं।
बसपा की रणनीति में दलित स्वाभिमान और आरक्षण को प्राथमिकता देना पार्टी के पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, रोजगार का मुद्दा उठाकर पार्टी युवाओं से जुड़े सवालों को भी चुनावी बहस के केंद्र में लाना चाहती है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश भी पार्टी की चुनावी योजना का हिस्सा मानी जा रही है।
युवा वोटरों को जोड़ने के लिए आकाश आनंद पर भरोसा
बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखने के साथ युवा मतदाताओं को भी पार्टी से जोड़ना चाहती है। इसके लिए राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को अहम जिम्मेदारी दी गई है। आकाश आनंद 28 अक्टूबर से बुलंदशहर में आयोजित सभा के जरिए अपने अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।
पार्टी की रणनीति में जेन-जी यानी युवा मतदाताओं को आकर्षित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसपा को उम्मीद है कि आकाश आनंद की सक्रियता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने से पार्टी की पहुंच नई पीढ़ी तक बढ़ेगी। रोजगार, सामाजिक सम्मान और आरक्षण जैसे विषयों के जरिए युवा मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
जातीय समीकरण के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करेंगी मायावती
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा प्रत्याशियों के चयन में भी सावधानी बरत रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती प्रमुख विधानसभा सीटों पर जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रही हैं। पार्टी का जोर ऐसे प्रत्याशियों को चुनने पर है, जिनकी संबंधित क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ मजबूत हो और जिनके जीतने की संभावनाएं बेहतर हों।
उम्मीदवारों के चयन के दौरान उनके सामाजिक आधार, स्थानीय प्रभाव और राजनीतिक स्थिति की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में आगामी चुनाव में जातीय समीकरण बसपा की टिकट वितरण रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दलित वोट बैंक के साथ युवाओं और पिछड़े वर्गों पर नजर
बसपा की चुनावी रणनीति का एक प्रमुख पहलू अपने पारंपरिक मतदाताओं के साथ नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाना है। दलित स्वाभिमान और आरक्षण के मुद्दों के जरिए पार्टी अपने मुख्य समर्थक वर्ग को एकजुट रखने की कोशिश करेगी। वहीं, रोजगार और युवाओं से जुड़े सवालों को उठाकर नए मतदाताओं को आकर्षित करने की योजना है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर मतदाताओं को साधने की कोशिश भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आकाश आनंद के नेतृत्व में शुरू हुआ अभियान आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा के जनाधार को कितना मजबूत कर पाता है और पार्टी बीजेपी के सामने कितनी प्रभावी चुनौती पेश करती है।