नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को उस वक्त सरगर्मी बढ़ गई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की। दोपहर 12:30 बजे शुरू हुई यह ‘हाई-लेवल’ मीटिंग करीब 30 मिनट तक चली। इसके बाद शाम 3:30 बजे सीएम योगी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिले।
PM-CM बैठक के 3 बड़े एजेंडे
- कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion): बैठक का मुख्य मुद्दा यूपी मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल रहा। चर्चा हुई कि नए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन (खासकर पश्चिम यूपी और ब्राह्मण चेहरे) को साधा जाए।
- SIR/नाम कटने का मुद्दा: बैठक में ‘SIR’ (संभवतः मतदाता/सर्वेक्षण सूची संदर्भ) को लेकर गंभीर चर्चा हुई। यह बात सामने आई कि बीजेपी के परंपरागत गढ़ों में ही कई समर्थकों के नाम कट गए हैं। केंद्रीय नेतृत्व की चेतावनी के बावजूद जमीनी नेताओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिस पर चिंता जताई गई।
- संगठन बनाम सरकार: चर्चा इस पर भी हुई कि संगठन के कुछ लोगों को सरकार में मंत्री बनाया जाए और कुछ मंत्रियों को वापस संगठन के काम में लगाया जाए।
यूपी कैबिनेट में क्या-क्या बदल सकता है?
सूत्रों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए योगी ‘टीम-27’ तैयार कर रहे हैं:
- खाली पद: पहले से 6 पद खाली थे। लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद और अनूप प्रधान के केंद्र में जाने से और जगह बनी है।
- बड़े नाम: चर्चा है कि प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
- प्रमोशन: अच्छा काम करने वाले कुछ राज्य मंत्रियों का कद बढ़ाकर उन्हें ‘स्वतंत्र प्रभार’ दिया जा सकता है।
- पश्चिम यूपी पर फोकस: चूंकि सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों पूर्वी यूपी से आते हैं, इसलिए मंत्रिमंडल में पश्चिमी यूपी का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। हालिया ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच इस वर्ग को भी साधने की तैयारी है।
मकसद सिर्फ एक: मिशन 2027
पार्टी का मुख्य उद्देश्य 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसी मजबूत और संतुलित टीम तैयार करना है, जिसमें हर वर्ग और क्षेत्र की हिस्सेदारी हो, ताकि विपक्ष के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट निकाली जा सके।