नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। इसी बीच रूस ने भारत को बड़ा राहत पैकेज देते हुए कच्चे तेल पर छूट बढ़ाकर 3-4 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इससे पहले यह छूट जुलाई में 1 डॉलर और पिछले हफ्ते 2.50 डॉलर प्रति बैरल थी।
सितंबर-अक्टूबर से लागू होंगी नई दरें
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में भारत को भेजे जाने वाले तेल पर यह नई कीमतें लागू होंगी। रूस का यह कदम ऐसे समय आया है जब ट्रंप लगातार भारत पर ट्रेड डील को लेकर निशाना साध रहे हैं। अमेरिकी सरकार ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे यह बढ़कर 50% हो गया है।
अमेरिका का आरोप: रूस को फंडिंग कर रहा भारत
ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर रूस को युद्ध के लिए फंडिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
“पुतिन के यूक्रेन पर हमला करने से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था। अब रूस छूट देता है तो भारत कम दामों पर तेल लेकर उसे रिफाइन कर यूरोप और अफ्रीका में प्रीमियम दामों पर बेचता है। इससे रूस को युद्ध में मदद मिलती है।”
रूस बन गया भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। साल 2022 से भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद 1% से बढ़ाकर 40% कर दी है। 2024-25 में भारत ने कुल 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जिसमें से 36% हिस्सा रूस से आया। यह इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका से होने वाले आयात से कहीं ज्यादा है।
भारत का जवाब: ऊर्जा व्यापार पूरी तरह जायज
भारत ने साफ कहा है कि रूस के साथ उसका एनर्जी ट्रेड अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक वैध है। भारत ने तर्क दिया कि कच्चे तेल की खरीद पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। साथ ही भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को एकतरफा और अनुचित बताया। भारत का कहना है कि वह रूस से बड़ी मात्रा में तेल और सैन्य उपकरण खरीदता है, जबकि अमेरिका से बहुत कम खरीदारी करता है।