दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट हादसे के अगले ही दिन मंगलवार (11 नवंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी के पास से बरामद हुई चीजें और वह जिन लोगों के संपर्क में था, उसे देखते हुए आरोपी का जेल में रहना ही बेहतर है।
“स्पष्ट संदेश देने के लिए यह सबसे अच्छी सुबह”
आरोपी के वकील सिद्धार्थ दवे ने सुनवाई के दौरान दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र करते हुए कहा कि, “कल जो हादसा हुआ, उसके बाद इस मामले पर बहस करने के लिए शायद यह अच्छी सुबह न हो।”
वकील की इस दलील पर बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “स्पष्ट संदेश देने के लिए यह सबसे अच्छी सुबह है।”
वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के पास से केवल इस्लामिक साहित्य जब्त किया गया है और वह 70% डिसएबल्ड भी है, साथ ही उसके पास से आरडीएक्स या कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है। जब वकील ने कहा कि आरोपी दो साल से जेल में बंद है, तो कोर्ट ने कहा कि “उस पर गंभीर आरोप लगे हैं।” कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि दो साल में ट्रायल खत्म हो जाएगा और यदि खत्म नहीं होता है, तो आरोपी जमानत के लिए दोबारा अपील कर सकता है।
कोर्ट ने आरोपी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वह जिस तरह के लोगों से ऑनलाइन संपर्क में था और जिस तरह की चीजें उसके पास से मिली हैं, उसके बाद उसे कड़े आतंक विरोधी कानून के तहत हिरासत में रखना ही सही है।
दिल्ली ब्लास्ट पर बड़ा अपडेट: फिदायीन हमले का शक
सोमवार की शाम को लाल किले के पास एक कार में हुए ब्लास्ट में अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है और 25 लोग घायल हुए हैं। कार रेड लाइट पर धीमी गति से चल रही थी तभी उसमें धमाका हुआ। सूत्रों के हवाले से शक जताया जा रहा है कि यह एक फिदायीन टेरर अटैक हो सकता है।
जांच में सामने आया है कि जिस कार में यह विस्फोट हुआ, उसे कश्मीरी डॉक्टर मोहम्मद उमर चला रहा था। पता चला है कि उमर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में था। विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल किया गया, जिससे धमाका बहुत तेज हुआ।
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब सोमवार को कुछ घंटे पहले ही दिल्ली पुलिस ने फरीदाबाद से 2,900 किलो विस्फोटक, हथियारों का भंडार और गोला बारूद जब्त किया था और आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि उमर दो अन्य लोगों के साथ इस हमले की योजना बना रहा था, लेकिन गिरफ्तारियों के बाद उसने जल्दबाजी में इसे अकेले ही अंजाम दिया।