सुप्रीम कोर्ट के बाहर सीवर की हाथ से सफाई पर बवाल, पीडब्ल्यूडी पर ₹5 लाख जुर्माना – जज बोले, “अधिकारियों को जगा दो”

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत के बाहर ही सीवर की हाथ से सफाई कराए जाने का मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की है। अदालत ने दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। खास बात यह है कि इस काम में एक नाबालिग मजदूर भी शामिल था। कोर्ट ने इसे अपने पुराने आदेशों का खुला उल्लंघन बताया।

सुप्रीम कोर्ट के बाहर मिला उल्लंघन

यह घटना सुप्रीम कोर्ट के गेट एफ के पास हुई, जहां मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर की मैनुअल सफाई कराई जा रही थी। 18 सितंबर 2025 (गुरुवार) को इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने पीडब्ल्यूडी पर सख्त रुख अपनाया।

पीडब्ल्यूडी की दलील खारिज

पीडब्ल्यूडी ने कोर्ट में सफाई दी कि मानसून को देखते हुए केवल ढके हुए नालों से गाद निकालने का काम किया जा रहा था और इसमें अधिकारियों की कोई गलती नहीं थी। लेकिन बेंच ने इस दलील को खारिज कर कहा कि यह अक्टूबर 2023 के आदेशों का उल्लंघन है।

कोर्ट की कड़ी चेतावनी

कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ पीडब्ल्यूडी ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के अधिकारियों को भी “जगाने” की जरूरत है ताकि अदालत के निर्देशों का पालन हो सके। बेंच ने चेतावनी दी –
“अगर ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आईं तो अदालत बीएनएस और बीएनएसएस के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश देने के लिए बाध्य होगी।”

नाबालिग को काम में लगाए जाने पर नाराजगी

इस मामले में न्यायमित्र के रूप में मौजूद सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने बताया कि वीडियो साक्ष्य में नाबालिग को सीवर की सफाई करते हुए रिकॉर्ड किया गया है। उन्होंने कहा –
“नाबालिग को काम पर लगाया गया और यह वीडियो में साफ तौर पर रिकॉर्ड हुआ है। यह केवल श्रम कानून का ही नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्वों का भी उल्लंघन है। जुर्माना सीधे अधिकारियों से वसूला जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में मैनुअल सीवर सफाई पर रोक लगा चुका है। अदालत ने कई बार इस अमानवीय प्रथा से होने वाली मौतों पर चिंता जताई है। लेकिन अब खुद अदालत के बाहर ऐसा मामला सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।

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