क्या खतरे में है सुनेत्रा पवार की डिप्टी CM वाली कुर्सी? तकनीकी पेच पर NCP ने दिया यह बड़ा जवाब

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर संवैधानिक नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है. दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी और नवनिर्वाचित उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया था कि सुनेत्रा पवार का पद खतरे में पड़ सकता है. इन तमाम अटकलों पर अब एनसीपी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और विपक्ष के सवालों का करारा जवाब दिया है.

अंजलि दमानिया ने क्यों उठाया सवाल?

दरअसल, यह पूरा विवाद सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया के एक दावे के बाद शुरू हुआ. दमानिया ने कहा था कि जब कोई सांसद अपने पद से इस्तीफा देता है, तो जब तक राष्ट्रपति उस इस्तीफे को स्वीकार नहीं कर लेते, तब तक वह व्यक्ति कोई दूसरा पद नहीं संभाल सकता. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि संवैधानिक प्रक्रिया के मुताबिक, सुनेत्रा पवार को पहले कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री के तौर पर शपथ लेनी चाहिए थी, क्योंकि ‘उपमुख्यमंत्री’ कोई संवैधानिक पद नहीं है. इसी तकनीकी पेंच के आधार पर दावा किया गया कि उनका पद खतरे में है.

सुनील तटकरे ने दिया नियमों का हवाला

इन दावों को खारिज करते हुए सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी को नियमों की पूरी जानकारी है. उन्होंने एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा, “कई वर्षों के राजनीतिक अनुभव के कारण हमें यह जानकारी है कि कौन शपथ ले सकता है, सदस्य न होने पर भी कोई व्यक्ति कितने समय तक पद पर रह सकता है. 1991 में अजित पवार का उदाहरण है, शरद पवार का भी उदाहरण हैं.” तटकरे ने साफ किया कि तकनीकी पहलुओं की जांच करने का पर्याप्त राजनीतिक अनुभव उनके पास है.

शपथ ग्रहण में नहीं हुई कोई जल्दबाजी

तटकरे ने शपथ ग्रहण के समय को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद शपथ नहीं ली गई थी. उन्होंने कहा, “दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने तुरंत उपमुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ली. हमने 72 घंटे बाद शपथविधि किया, तात्कालिक रूप से नहीं. सरकारी शोक समाप्त होने के बाद सुनेत्रा पवार ने शपथ ली.”

अंतिम संस्कार के वक्त विलय की बातें क्यों?

पार्टी के विलय को लेकर चल रही खबरों पर सुनील तटकरे ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने भावुक होते हुए पूछा, “जब अजित पवार का शव अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, तब विलय की चर्चा किसने और क्यों शुरू की? अंतिम संस्कार से पहले ही विलय को लेकर इंटरव्यू देने का उद्देश्य क्या था?” तटकरे ने कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसमें उन्हें और प्रफुल्ल पटेल को बेवजह आलोचना का शिकार होना पड़ा.

सुनेत्रा भाभी ने संभाली पार्टी की कमान

सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार के साहस की तारीफ की. उन्होंने कहा, “सुनेत्रा भाभी ने जिस तरह खुद को संभालते हुए पार्टी को मजबूती देने और दादा द्वारा आगे बढ़ाए गए विचारों को आगे ले जाने के लिए यह कदम उठाया, वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विलय और इसके पीछे किसका क्या उद्देश्य था, इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता.” साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि “भाजपा के साथ स्थिर और विकासोन्मुख सरकार बननी चाहिए, ऐसी इच्छा अजित पवार ने 2019 में ही जताई थी.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *