कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। दरअसल, पिछले साल राज्यसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट डाला था, जिसके बाद से ही उनके रुख पर सवाल उठने लगे थे। गुरुवार को सदन में जब पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुले मंच से तारीफ की, तो सपा अध्यक्ष ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।
भाजपा में जाने की तैयारी?
निष्कासन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूजा पाल अब भाजपा का दामन थाम सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी में शामिल होने पर उन्हें मंत्री पद भी मिल सकता है। सपा में रहते हुए उनके लिए मंत्री बनने की संभावना लगभग न के बराबर थी।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद बदला रुख
पूजा पाल 2022 में चायल सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं। लेकिन उमेश पाल हत्याकांड के बाद उनका रुख धीरे-धीरे भाजपा के प्रति सकारात्मक होता गया। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया था।
सपा की सफाई
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने कहा, “जो भी पार्टी विरोधी काम करेगा, उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। पूजा पाल को जून में चेतावनी दी गई थी लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसलिए निष्कासन अनिवार्य हो गया।”
पल्लवी पटेल का रुख भी चर्चा में
कौशांबी की सिराथू सीट से सपा विधायक पल्लवी पटेल भी लंबे समय से पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं। लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर उनका भी नेतृत्व से टकराव हुआ था। हालांकि, उन्होंने अभी अपना रुख साफ नहीं किया है।
सपा की मौजूदा स्थिति
कौशांबी जिले की तीनों सीटों पर सपा का कब्जा है – चायल से पूजा पाल, सिराथू से पल्लवी पटेल और मंझनपुर से इंद्रजीत सरोज। प्रयागराज की 12 विधानसभा सीटों में भी चार पर सपा के विधायक हैं। लेकिन लगातार बढ़ते असंतोष और विधायकों के बगावती रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।