Sonia Gandhi की किताब Belonging में खुलेंगे जिंदगी के कई राज, Rajiv Gandhi से मुलाकात से लेकर PM पद ठुकराने तक की कहानी

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की नई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने जा रही है। 544 पन्नों की यह किताब सोनिया गांधी के निजी जीवन, परिवार, भारत आने की कहानी और उनके लंबे राजनीतिक सफर पर केंद्रित है। किताब में उनके जीवन के ऐसे कई महत्वपूर्ण पड़ावों का जिक्र किया गया है, जिन्होंने उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन की दिशा तय की।

यह किताब पेंगुइन रैंडम हाउस से जुड़े प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नोपफ द्वारा प्रकाशित की जाएगी। किताब की विषयवस्तु के अनुसार, इसमें इटली में सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी के साथ उनके रिश्ते और गांधी परिवार के साथ बिताए जीवन के महत्वपूर्ण दौर को शामिल किया गया है।

Cambridge में हुई थी Rajiv Gandhi से पहली मुलाकात

‘Belonging: A Journey of Love’ की कहानी 1965 के कैम्ब्रिज से शुरू होती है। उस समय 19 वर्षीय सोनिया माइनो पढ़ाई के लिए इंग्लैंड में थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। किताब के मुताबिक, यह मुलाकात आगे चलकर प्रेम संबंध और फिर शादी में बदल गई, जिसके बाद सोनिया गांधी का जीवन भारत से गहराई से जुड़ गया।

भारत आने के बाद सोनिया गांधी ने धीरे-धीरे भारतीय जीवनशैली और संस्कृति को अपनाया। उन्होंने हिंदी भाषा सीखी, साड़ी पहनने की शैली अपनाई और भारतीय खान-पान को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया। किताब में उनके इस बदलाव और भारत के साथ उनके जुड़ाव की कहानी को विस्तार से बताया गया है।

इंदिरा गांधी और गांधी परिवार के मुश्किल दौर का जिक्र

किताब में सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के संबंधों तथा उनके साथ जुड़े अनुभवों को भी जगह दी गई है। इसके अलावा गांधी परिवार के सामने आए कई कठिन दौर का उल्लेख भी किया गया है।

इसमें राजीव गांधी के भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना में हुई मौत और वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार पर पड़े प्रभाव का जिक्र है। इन घटनाओं के बाद, सोनिया गांधी की इच्छा के बावजूद राजीव गांधी राजनीति में आए और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने।

Rajiv Gandhi की हत्या के बाद बदली सोनिया की जिंदगी

‘Belonging’ में राजीव गांधी की वर्ष 1991 में हुई हत्या से जुड़ा अध्याय भी महत्वपूर्ण है। चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हुए आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।

किताब के प्रकाशक के अनुसार, सोनिया गांधी ने इस त्रासदी को अपने नजरिए से पेश किया है और बताया है कि इस घटना के बाद उनके जीवन में किस तरह के बदलाव आए। राजीव गांधी की हत्या के बाद उन्होंने लंबे समय तक खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखा।

लंबे इंतजार के बाद राजनीति में उतरीं सोनिया गांधी

राजीव गांधी की मृत्यु के बाद सोनिया गांधी ने काफी समय तक सक्रिय राजनीति में प्रवेश नहीं किया। हालांकि, बाद के वर्षों में उन्होंने कांग्रेस की जिम्मेदारी संभाली और लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं। किताब में उनके राजनीतिक सफर, कांग्रेस के नेतृत्व और इस दौरान सामने आई चुनौतियों से जुड़े अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

2004 में PM पद ठुकराने का फैसला

सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन से जुड़ा सबसे चर्चित फैसला वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करना रहा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था, लेकिन उन्होंने इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद संभाला और कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने केंद्र में सत्ता स्थापित की। सोनिया गांधी की किताब में उनके इस महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय और उससे जुड़े अनुभवों को भी जगह दी गई है।

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