नई दिल्ली/पटना: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर इन दिनों अपनी बिहार यात्रा और वहां के अनुभवों को लेकर सुर्खियों में हैं। नालंदा साहित्य महोत्सव में शिरकत करने पहुंचे थरूर ने राज्य की ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखा और इससे वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के गौरवशाली अतीत पर एक कविता लिख डाली। बुधवार (24 दिसंबर, 2025) को साझा की गई इस कविता के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि विध्वंस से इमारतें गिर सकती हैं, लेकिन इतिहास और ज्ञान अमर रहता है। उन्होंने अपनी कविता में बताया कि कैसे आठवीं शताब्दी तक नालंदा ज्ञान का वैश्विक केंद्र हुआ करता था।
सोशल मीडिया पर साझा किए अपने जज्बात
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए लिखा, “‘नालंदा! गज़ब इतिहास है अपना, गज़ब बीता ज़माना था, सारी दुनिया के लोगों का, यहां तब आना जाना था. कवि, शायर और दर्शन के, बड़े विद्वान आते थे, बौद्ध अनुयायी भी आकर यहां शांति सिखाते थे.'”
उन्होंने भारत के पुनरुत्थान की बात करते हुए आगे लिखा, “‘शतक कुछ आठ तक शायद, ज्ञान का दरिया बहता था, सारी दुनिया से आकर के यहां ज्ञानार्थी रहता है. हमें वो दौर गुजरा फिर, यहीं पर वापिस लाना है. हम गिर कर उठ भी सकते हैं, हमें सबको दिखाना है. जलाने से किताबें चंद, कभी इतिहास नहीं मरता. जो मरते होंगे, वो हैं आम हिंद! सा, खास नहीं मरता.'”
तारीफ पर हुए विवाद पर दी सफाई
गौरतलब है कि अपनी इस यात्रा के दौरान बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक सुविधाओं और ऐतिहासिक धरोहरों की तारीफ करने पर शशि थरूर सियासी गलियारों में घिर गए थे। कयास लगाए जाने लगे कि वे एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री की प्रशंसा कर रहे हैं। इस बढ़ते विवाद पर विराम लगाते हुए उन्होंने अपना पक्ष रखा। थरूर ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने न तो भाजपा का जिक्र किया और न ही किसी सीएम या नेता का नाम लिया. मैंने नालंदा विश्वविद्यालय और दो म्यूजियम, जिनकी सैर की, उनकी तारीफ की. ऐसी आम बातों पर राजनीतिक विवाद क्यों खड़ा करना चाहिए, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है?”