संसद का ठप रहना चिंता का विषय

देश में कानून व्यवस्था की समुचित बहाली के साथ विकास की कार्य योजनाएं तैयार करने का काम संसद में होता है। किंतु सत्ता की बढ़ती महत्वाकांक्षा के चलते संसद में जनहित के विषयों पर होने वाली चर्चा का स्थान राजनीतिक बहसबाजी ने ले लिया है। अनेक मुद्‌दों पर विधेयक संसद में स्वीकृति के लिए लंबित हैं। लेकिन जनहित के इन मसलों पर विमर्श की बजाय संसद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे है, जो अज़ीब है।संसद में शीतकालीन सत्र का आज 5वां दिन था। 5वें दिन भी दोनों सदनों में कार्यवाही ठप रही। बता दें, शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में कुछ देर तक कार्यवाही चलने के बाद भारी हंगामे की वजह से ठप कर दी गई। वहीं दूसरे हफ्ते के पहले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ। लोकसभा और राज्य सभा की कार्यवाही स्थगित किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की।बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “आज लोकसभा स्पीकर के साथ ऑल पार्टी फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई। कुछ दिनों से संसद में बने गतिरोध पर सबने चिंता व्यक्त की है। संसद इतने दिन तक नहीं चलना, जनता का पैसा बर्बाद करना, ये ठीक नहीं है।कांग्रेस सदस्य लोकसभा और राज्यसभा में अदाणी समूह से जुड़े मामले को उठा रहे हैं, वहीं सपा सांसद संभल हिंसा के मामले पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। सोमवार को भी दोनों सदनों की कार्यवाही आधा घंटा भी नहीं चल सकी.कांग्रेस ने को कहा कि विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही चलने देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि संविधान पर चर्चा हो। वहीं संसद की कार्यवाही से पहले इंडिया ब्लॉक के नेताओं की राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से हुई जिसमें राहुल गांधी तो शामिल हुए लेकिन टीएमसी से कोई भी सदस्य इसमें नहीं पहुंचा.दरअसल तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि सदन में मंहगाई, बेरोजगारी, किसान, उर्वरक, विपक्षी राज्यों को मिलने वाले पैसे में कटौती और मणिपुर जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा हो। वहीं कांग्रेस चाहती है कि अडानी मुद्दे पर ही चर्चा हो. वहीं कांग्रेस के रूख से सपा भी किनारा करती दिख रही है. वहीं अन्य विपक्षी दल भी चाहते हैं कि किसान, संभल और मणिपुर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो.यानि विपक्षी दलों में टीएमसी का रुख साफ है कि संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा हो, कमोबेश ऐसा ही कुछ समाजवादी पार्टी भी चाहती है. सपा सांसदों ने आज लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और संभल मुद्दे पर चर्चा का अनुरोध किया. सपा नेताओं के अनुसार अडानी का मुद्दा संभल जितना बड़ा नहीं है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हमारे लिए अदाणी से बड़ा मुद्दा किसान हैं.। यानि कांग्रेस भले ही अदाणी अदाणी का रट लगाए बैठी हो, मगर विपक्ष के कई दल और भी मुद्दों पर बहस करना चाहते हैं। दरअसल, 5 नवंबर से सत्र की शुरुआत हुई और लोकसभा महज 6 मिनट चली 26 नवंबर को संविधान दिवस था तो राष्ट्रपति का अभिभाषण था. 27 नवंबर को महज़ 15 मिनट लोकसभा की कार्यवाही चली 28 नवंबर को भी महज़ 15 मिनट 29 नवंबर को 20 मिनट और आज यानि 2 दिसंबर को 13 मिनट की कार्यवाही चली. आलम ये है कि 25 नवंबर से अबतक कुल 69 मिनट का लोकसभा चली। लोकसभा में अबतक सिर्फ 4 फीसदी काम हुआ और राज्यसभा में महज 5 फीसदी काम हुआ है.संसद का ठप रहना चिंता का विषय है इसीलिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, और अच्छी बात ये है कि इस बैठक में सभी दलों ने शांति से सदन चलाने पर सहमति जताई है। अब देखना होगा कि सहमति कितना मूर्त रूप लेती है।

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