
शाहजहांपुर जिले में नदियों का जलस्तर कम हो रहा है। बाढ़ से फिलहाल राहत है लेकिन बाढ़ के बाद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जिले में शुद्ध पेयजल की सबसे बड़ी किल्लत है। सबमर्सिबल और हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं।संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की 44 मेडिकल टीमों द्वारा प्रभावित इलाकों में इलाज किया जा रहा है। गर्रा नदी में दियूनी डैम से 4042 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उधर, पीलीभीत में प्रशासन ने कलीनगर और पूरनपुर के सीमांत गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, खीरी में पलिया- भीरा हाईवे-731 छह जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। बाढ़ से जिले के 200 गांव प्रभावित हैं।
हैंडपंप से आ रहा गंदा पानी
बाढ़ का पानी कम होने के बाद हजारों लोगों के सामने शुद्ध पानी का संकट खड़ा हो गया है। परेशान लोग खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं। लोगों को खाने पीने की चीजों से लेकर पीने के पानी की समस्या हो गई है। शहर के लोक विहार कालोनी, ख्वाजा फिरोज, लोदीपुर, ब्रजबिहार, आवास विकास, साउथ सिटी सहित अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में शुद्ध पानी नहीं आ रहा है। क्षेत्र में कई जगह नल तथा मोटर से दूषित पानी पीला आने लगा है, पानी का स्वाद भी बदल गया है, तथा पानी में दुर्गंध आने लगी है।
मेडिकल कॉलेज में जल्द होगी सेवाएं शुरू
राजकीय मेडिकल कॉलेज में बाढ़ का पानी घुसने से सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी गई थीं। मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट कराना पड़ गया था। मरीजों को दिक्कत न हो इसलिए सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने भावलखेड़ा सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं शुरू कराई, लेकिन वह लोगों के लिए काफी दूर पड़ रहा है। इधर, मेडिकल कॉलेज के वार्डों से बाढ़ का पानी निकल चुका है, लेकिन कॉलेज कैंपस के निचले हिस्से में कहीं-कहीं अभी बाढ़ का पानी भरा है।
रविवार सुबह प्राचार्य डा. राजेश कुमार अपनी टीम के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। कर्मचारियों को बुलाया और वहां की सफाई कराई। ट्रामा सेंटर, ओपीडी, मेल-फिमेल वार्ड, इमरजेंसी वार्ड में हर जगह कीचड़ ही कीचड़ है। बिजली सप्लाई सुचारू न होने की वजह से पानी से साफ-सफाई नहीं हो सकी। प्राचार्य का कहना है कि अभी व्यवस्था शुरू होने में चार-पांच दिन का समय लग सकता है।