Russia Warns America: अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई हालिया एयरस्ट्राइक के बाद वैश्विक तनाव और बढ़ गया है। इस बीच, रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के एक बयान ने वाशिंगटन और खासकर डोनाल्ड ट्रंप की चिंता और गहरा दी है। मेदवेदेव ने कहा है कि अमेरिका ने एक नया युद्ध शुरू कर दिया है और ईरान को रोकने के प्रयास उल्टा असर डाल सकते हैं।
“शांति के नाम पर युद्ध”: मेदवेदेव का ट्रंप पर सीधा हमला
मेदवेदेव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जो राष्ट्रपति ट्रंप खुद को शांति का दूत बताकर सत्ता में आए थे, वही अब अमेरिका को एक और युद्ध में झोंक चुके हैं।” उन्होंने अमेरिका की एयरस्ट्राइक को बेअसर करार देते हुए कहा कि इससे ईरान के बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।
“ईरान अब भी बना सकता है परमाणु हथियार”
पूर्व रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर खास असर नहीं पड़ा है और देश निकट भविष्य में फिर से परमाणु हथियार बनाने में सक्षम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब ईरान को लेकर वैश्विक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
“कई देश ईरान को सीधे परमाणु हथियार देने को तैयार”
सबसे चौंकाने वाला बयान तब आया जब मेदवेदेव ने दावा किया कि दुनिया के कई देश ईरान को सीधे तौर पर परमाणु हथियार देने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किन देशों की बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल अब निरंतर खतरे में है और वहां विभिन्न इलाकों में विस्फोट हो रहे हैं।
“ईरान का शासन और मज़बूत हुआ”
रूसी नेता का कहना है कि इन हमलों से ईरान का राजनीतिक तंत्र कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत हुआ है। उनके अनुसार, “देश की जनता अब अपने आध्यात्मिक नेतृत्व के साथ खड़ी हो रही है—यहां तक कि वे लोग भी, जो पहले उदासीन या विरोधी थे।”
ईरान ने बातचीत से किया इंकार, अमेरिका पर लगाया धोखा देने का आरोप
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस रवाना होने से पहले बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब अमेरिका से किसी भी तरह की परमाणु वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “हम जब कूटनीतिक बातचीत में व्यस्त थे, तब इजरायल ने हमला किया और अमेरिका ने हमारे परमाणु ठिकानों पर स्ट्राइक कर दी। यह अमेरिका की ओर से एक बड़ा धोखा था।”
अराघची ने बताया कि हमले से महज दो दिन पहले जिनेवा में यूरोपीय देशों के साथ वार्ता चल रही थी। ऐसे में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने कूटनीतिक प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।