वक्फ विधेयक के विरोध की झूठी कहानी फैला रहे लोग, समर्थन में हैं मुस्लिम संगठन: रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ विधेयक पर चल रहे विरोध को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम संगठन इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग इसके खिलाफ झूठी कहानी फैला रहे हैं कि सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक के जरिए मुस्लिमों की जमीन छीन लेगी।

उन्होंने कहा कि जितने भी संगठनों से मैंने बात की है वह सभी इसका समर्थन कर रहे हैं।

रिजिजू ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति को वक्फ संशोधन विधेयक के संबंध में रिकॉर्ड संख्या में सिफारिशें मिली हैं, जिन्हें समीक्षा के लिए भेजा गया था। उन्होंने कहा कि कई लोग इस बात का झूठा प्रचार कर रहे हैं कि इसके द्वारा केंद्र मुस्लिम समुदाय की जमीन छीनने का काम करेगी,यह झूठी बात है इसका प्रचार बंद होना चाहिए, लोगों को इस झूठे नैरेटिव को आगे आकर तोड़ना चाहिए। संसदीय समिति द्वारा वक्फ अधिनियम में सुधार के जो प्रयास किए जा रहे हैं वह एक व्यापक राष्ट्रीय पहल का हिस्सा है। यह संशोधन सुनिश्चित करेंगे कि वक्फ संपत्तियों का मुस्लिम समुदाय के व्यापक हित के लिए किया जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसदीय समिति संशोधन विधेयक के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा कर रही है, जिसमें रिकॉर्ड का डिजटलीकरण, सख्त ऑडिट, कानूनी सहारा और वक्फ प्रबंधन का डि-सेंट्रलाइजेशन शामिल है।

वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर संसदीय समिति 26 सितंबर से 1 अक्तूबर तक पांच राज्यों में विभिन्न हितधारकों के साथ अनौचारिक चर्चा में शामिल होने के लिए तैयार है। इन चर्चाओं का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित परिवर्तनों को बढ़ाना है, जो देश भर में 6 लाख से ज्यादा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की देखरेख करता है।

वक्फ अधिनिमय को मूल रूप से 1995 में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने का था। लेकिन इस पर समय-समय पर कुप्रबंधन, अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।

मोदी सरकार की तरफ से लाए गए इस वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य इसमें व्यापक सुधारों को लागू करना है। इसमें डिजटलीकरण, कठोर ऑडिट सिस्टम और पारदर्शिता को लागू करना और गैर कानूनी तरीके से कब्जाई गई संपत्तियों को वापस लेने के लिए कानूनी उपाय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह चर्चाएं यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि वक्फ अधिनियम में संशोधन व्यावहारिक, प्रभावी और सामुदायिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी हैं। संसदीय सत्र के पहले सप्ताह के खत्म होने तक इस समिति के रिपोर्ट देने की उम्मीद है।

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