ऑपरेशन सिंदूर का मकसद युद्ध नहीं था, राजनाथ सिंह ने दी सफाई, बताया क्या हासिल किया गया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करना नहीं था, बल्कि आतंकवादियों के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाना था। गुरुवार (2 अक्टूबर 2025) को दशहरा के मौके पर गुजरात के भुज स्थित सैन्य अड्डे पर शस्त्र पूजा के दौरान सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

क्या-क्या कहा राजनाथ ने

राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को बेनकाब कर दिया और दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सेनाएँ जब चाहें और जहाँ चाहें, पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा—
“ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की असफल कोशिश की. अपनी जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया और दुनिया को यह संदेश दिया कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं.”

उसी संदर्भ में उन्होंने यह भी दोहराया—
“इसे बढ़ाना और युद्ध छेड़ना ऑपरेशन सिंदूर का मकसद नहीं था.”

ऑपरेशन सिंदूर: पृष्टभूमि और समय-रेखा

राजनाथ ने बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई की मध्यरात्रि को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच लगभग 3-4 दिनों तक सीमापार कार्रवाईें जारी रहीं और 10 मई को सहमति के साथ कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी और सीज़फ़ायर हुआ।

संयम और संदेश दोनों का ज़िक्र

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने संयम बरता क्योंकि उसकी कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ थी — न कि किसी सैन्य महाभारत की शुरुआत के लिये। उन्होंने 1965 युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने तब भी शक्ति का प्रदर्शन किया था, और आज भी पाकिस्तान को यह याद रखना चाहिए कि कराची जाने का एक रास्ता सर क्रीक से होकर गुजरता है — यह टिप्पणी सुरक्षा व रणनीतिक संदेश के रूप में सामने आई।

राजनाथ सिंह के संबोधन ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर का केंद्र बिंदु आतंकवाद की रोकथाम और रणनीतिक संदेश देना था, न कि जंग छेड़ना। साथ ही, उन्होंने भारतीय सेना की सक्रियता और उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए यह संदेश भी दिया कि भारत अपनी सीमाओं और सुरक्षा के मामले में सतर्क व सक्षम है।

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