राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा, NEET समेत कई मुद्दों पर दिया था बयान; अब बहस की मांग

संसद में मंगलवार के दिन की शुरुआत भी हंगामेदार रही। इस बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बुधवार को एनईईटी मुद्दे पर संसद में बहस का अनुरोध किया है।

इससे पहले सोमवार को राहुल गांधी ने नीट समेत कई मुद्दों पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया था। इसके अलावा राज्यसभा में भी कई विपक्षी दलों ने देश में विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने के बढ़ते मामलों, राज्यों के साथ भेदभाव किए जाने और केंद्रीय एजेंसियों को औजार बनाकर विपक्षी नेताओं को परेशान करने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि ‘अहंकार’ से देश को नहीं चलाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में मांग की है, “हमारा उद्देश्य 24 लाख एनईईटी उम्मीदवारों के हित में रचनात्मक रूप से शामिल होना है, जो जवाब के हकदार हैं। मेरा मानना ​​है कि यह उचित होगा यदि आप इस बहस का नेतृत्व करें।”

इससे पहले राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में चर्चा के दौरान मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने नीट एग्जाम पेपर लीक पर सरकार को निशाने पर लिया। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगया कि नीट एग्जाम अब कमर्शियल एग्जाम बनकर रह गया है। तमाम कानूनों के बावजूद पेपर लीक न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि, लाखों बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया। वे छात्र जिन्होंने, कई वर्षों तक पेपर की तैयारी की, ऐसी घटना उनके लिए बहुत गलत है। यह घटना सरकार की नाकामी दर्शाती है।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों के छात्र संगठनों ने भी मंगलवार को नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा नीत केंद्र की आलोचना की और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए सभी 24 लाख उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित किये जाने की अपनी मांग दोहरायी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट विवादों से घिरी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ से जुड़ी याचिकाओं पर आठ जुलाई को सुनवाई करेगा। इनमें पांच मई को हुई परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली तथा इसे नए सिरे से कराए जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं भी शामिल हैं।

सुप्रीम अदालत की वेबसाइट पर आठ जुलाई के लिए अपलोड की गयी वाद सूची के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ 26 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

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