कांग्रेस ने 2026 का पंचायत चुनाव अकेले लड़ने का लिया फैसला, 2027 में इंडिया अलायंस के साथ उतरने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अभी से शुरू कर दी है। हाल ही में कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में यह फैसला लिया था कि पार्टी वर्ष 2026 में प्रस्तावित पंचायत चुनाव अकेले लड़ेगी।

अब 11 दिसंबर, गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में हुई एक और महत्वपूर्ण बैठक से यह संकेत मिल रहे हैं कि वर्ष 2027 के चुनाव में पार्टी एक बार फिर प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में चुनावी मैदान में उतर सकती है।

प्रियंका की मौजूदगी ने दिए संकेत

गुरुवार को हुई इस बैठक में राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, यूपी इकाई के अध्यक्ष अजय राय, प्रभारी अविनाश पांडेय और विधानसभा में कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा मोना मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया साइट X पर कांग्रेस के अधिकृत अकाउंट से तस्वीरें पोस्ट करते हुए बताया गया कि कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की समीक्षा बैठक कर आगामी रणनीतियों पर चर्चा की।

पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की दावेदारी

जानकारों के मुताबिक, इस बैठक में मुख्य रूप से आगामी पंचायत चुनाव पर चर्चा हुई। कांग्रेस की रणनीति है कि पंचायत चुनाव में जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा और वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए उनकी दावेदारी पक्की हो सकती है। इसके साथ ही, पार्टी लोकसभा चुनाव 2024 में बने मोमेंटम को जनता में बरकरार रखने के कार्यक्रमों पर भी चर्चा कर रही है।

सपा के साथ गठबंधन, फिर भी 403 सीटों पर तैयारी

वर्ष 2027 के चुनाव को लेकर यह स्पष्ट है कि यूपी में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ इंडिया अलायंस के तहत चुनाव लड़ेगी। सपा चीफ अखिलेश यादव भी हाल ही में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ ही चुनाव लड़ेगी।

हालांकि, कांग्रेस चीफ अजय राय कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि पार्टी सभी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है। जानकारों का मानना है कि इस रणनीति का मकसद यह है कि भले ही सपा के साथ अलायंस हो, लेकिन सीटों के बंटवारे में पार्टी एक हद तक अपनी बात मनवाने में सफल हो सके।

सीट शेयरिंग में प्रियंका की भूमिका अहम

सूत्रों का कहना है कि अगर यूपी में प्रियंका गांधी फिर से चुनाव के संदर्भ में जिम्मेदारी संभालती हैं, तो यह तय है कि सपा के साथ सीट शेयरिंग में ज्यादा तकरार नहीं होगी।

  • लोकसभा चुनाव के दौरान जब कुछ सीटों पर पेच फंसा था, तो कांग्रेस की ओर से प्रियंका ने ही कमान संभाली थी और राहुल से वार्ता के बाद अखिलेश से इस पर चर्चा की थी।
  • इस दावे को यह बात पुष्ट करती है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब सपा चीफ करहल सीट से चुनाव लड़ रहे थे, तब प्रियंका की अगुवाई में कांग्रेस ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा था।

बीते कुछ दिनों में कांग्रेस हाईकमान द्वारा यूपी पर की जा रहीं बैठकों ने यह संकेत दे दिए हैं कि पार्टी, वर्ष 2026 में पंचायत और वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव में हुए सियासी लाभ को बनाए रखना चाहेगी।

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