कांग्रेस सिर्फ प्रियंका गांधी को ही प्रोजेक्ट कर रही है, नहीं निभा रही विपक्ष की भूमिका… TMC सांसद का अटैक

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद इंडिया गठबंधन के घटक दलों में तकरार बढ़ने लगी है. संसद सत्र के दौरान कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टियां तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. शुक्रवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही है. संसद सत्र के दौरान कांग्रेस सिर्फ प्रियंका गांधी को ही प्रोजेक्ट करती रही.संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन संसद में इंडिया अलायंस ने सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए के खिलाफ मार्च किया, तो तृणमूल कांग्रेस ने ‘एकला चलो’ नीति पर चलते हुए आंबेडकर प्रतिमा के नीचे अपना अलग विरोध प्रदर्शन किया. इस मुद्दे पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच तकरार खुलकर सामने आ गई है.तृणमूल कांग्रेससांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कांग्रेस के साथ रिश्तों को लेकर विस्फोटक टिप्पणी की है. उन्होंने कहा, ”कांग्रेस इस सत्र में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाने में विफल रही है.” इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा में पहली बार सांसद चुनी गईं प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी निशाना साधा.उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस सिर्फ प्रियंका को प्रोजेक्ट कर रही है. और आंबेडकर मुद्दे पर फैसला लेकर वे अन्य गठबंधन सहयोगियों पर दबाव बना रही है, लेकिन सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ कर दिया कि गठबंधन और अन्य सहयोगियों का इन विस्फोटक टिप्पणियों से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस अपनी नीति के अनुसार आगे बढ़ रही है और इंडिया गठबंधन के साथ है.”बंगाल कांग्रेस ने सुदीप बंद्योपाध्याय के बयान पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी-तृणमूल में सेटिंग हो गई है. कांग्रेस नेता सौम्या आइच रॉय ने कहा, ”सुदीप बंद्योपाध्याय पीएम मोदी को खुश करने की भाषा बोल रहे हैं. टीएमसी संसद में आडानी के खिलाफ मुंह नहीं खोलती है. वे चुप हैं. वे वास्तव में गठबंधन को कमजोर कर रहे हैं.” वहीं, बीजेपी नेता जगन्नाथ चटर्जी ने कहा, ‘वे लोकसभा चुनाव में भी अनुपस्थित थे. गठबंधन पूरी तरह टूट चुका है.’गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस-तृणमूल अलग-अलग राह अपनाई हुई थी. सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस द्वारा बुलाई गई अखिल भारतीय बैठक में भी तृणमूल मौजूद नहीं थी. सत्र में रणनीति पर चर्चा के लिए तृणमूल ने कालीघाट में बैठक की. वहीं, शुक्रवार को शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन भी गठबंधन में वर्चस्व की लड़ाई जारी रही. आंबेडकर मुद्दे पर विभाजन दिखा. दूसरी ओर, कांग्रेस और अखिलेश यादव की पार्टी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है.

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